Friday, 15 September 2017

पंचगव्य... गाय के दूध, घृत, दही, गोमूत्र और गोबर



गाय के दूध, घृत, दही, गोमूत्र और गोबर के रस को मिलाकर पंचगव्य तैयार होता है। पंचगव्य के प्रत्येक घटक द्रव्य महत्वपूर्ण गुणों से संपन्न हैं।इनमें गाय के दूध के समान पौष्टिक और संतुलित आहार कोई नहीं है। इसे अमृत माना जाता है। 
यह विपाक में मधुर, शीतल, वातपित्त शामक, रक्तविकार नाशक और सेवन हेतु सर्वथा उपयुक्त है।
गाय का दही भी समान रूप से जीवनीय गुणों से भरपूर है। गाय के दही से बना छाछ पचने में आसान और पित्त का नाश करने वाला होता है।गाय का घी विशेष रूप से नेत्रों के लिए उपयोगी और बुद्धि-बल दायक होता है। इसका सेवन कांतिवर्धक माना जाता है।गोमूत्र प्लीहा रोगों के निवारण में परम उपयोगी है। रासायनिक दृष्टि से देखने पर इसमें पोटेशियम, मैग्रेशियम, कैलशियम, यूरिया, अमोनिया, क्लोराइड, क्रियेटिनिन जल एवं फास्फेट आदि द्रव्य पाये जाते हैं।गोमूत्र कफ नाशक, शूल गुला उदर रोग, नेत्र रोग, मूत्राशय के रोग, कष्ठ, कास, श्वास रोग नाशक, शोथ, यकृत रोगों में राम-बाण का काम करता है।चिकित्सा में इसका अन्त: बाह्य एवं वस्ति प्रयोग के रूप में उपयोग किया जाता है। यह अनेक पुराने एवं असाध्य रोगों में परम उपयोगी है।गोबर का उपयोग वैदिक काल से आज तक पवित्रीकरण हेतु भारतीय संस्कृति में किया जाता रहा है।यह दुर्गंधनाशक, पोषक, शोधक, बल वर्धक गुणों से युक्त है। विभिन्न वनस्पतियां, जो गाय चरती है उनके गुणों के प्रभावित गोमय पवित्र और रोग-शोक नाशक है। दुग्धाहार, श्रेष्ठाहार- दूध स्तनधारी प्राणियों के लिये वरदान है उस ईश्वर का जिसने दुनिया में उन्हें भेजा। गाय के साथ-साथ भैंस और बकरी के दूध का भी हम इस्तेमाल करते हैं। शायद ही ऐसा कोई मनुष्य हो जो दूध का पान किए बगैर ही बड़ा हो गया हो। “मातृ क्षीरंत अमृतं शिशुभ्य:” मां का दूध बच्चे के लिये अमृत है। गौमाता की सुरक्षा के लिए संकल्प लीजिए, गौमाता की पूजा के लिये संकल्प लीजिए। चाहे किसी भी जाति सम्प्रदाय के हों, दूध पीने की आदत डालें। प्रक्रिया जो भी हो, मांस लाल होता है, दूध सफेद होता है। सफेद यानी शांति का प्रतीक। यह भी ईश्वर का एक संकेत ही है।
गाय को लेकर विशेष चर्चा इसलिए है कि गाय को बचाने के प्रयास हो रहे हैं। गाय हमारी माता है। हम सब उसके बच्चे हैं, उसके दूध पर आश्रित हैं। गाय का दूध गिलास में लेकर हम पीते हैं तो यह पुष्टिका है, कम से कम इतना तो कहा जा सकता है। गाय के दूध की उपयोगिता का वर्णन प्राय: असंभव है। ये बड़ी-बड़ी डेयरियां कहां से चलती हैं? ये पकवान कहां से बनते हैं? ये चाकलेट कहां से बनती है? ये मिठाइयां कहां से बनती हैं? स्वादिष्ट पनीर, दही, मावा सब के सब दूध से ही ताे बनते हैं। एक तरह से दूध न होता तो संसार नहीं होता।
गौमाता को अपने घर में रखकर तन-मन-धन से सेवा करनी चाहिये, ऐसा कहा गया है जो तन-मन-धन से गौ की सेवा करता है, तो गौमाता उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी करती है।यदि रास्ते में गौ आती हुई दिखे, तो उसे अपने दाहिने से जाने देना चाहिये।गौ के सामने कभी पैर करके बैठना या सोना नहीं चाहिये, न ही उनके ऊपर कभी थूकना चाहिये, जो ऐसा करता है वो महान पाप का भागी बनता है।गौमाता को घर पर रखकर कभी भूखी – प्यासी नहीं रखना चाहिये, न ही गर्मी में धूप में बाँधना चाहिये। ठण्ड में सर्दी में नहीं बाँधना चाहिये, जो गाय को भूखी – प्यासी रखता है उसका कभी श्रेय नहीं होता।नित्य प्रति भोजन बनाते समय सबसे पहले गाय के लिए रोटी बनानी चाहिये। गौग्रास निकालना चाहिये। गौ ग्रास का बड़ा महत्व है।गौओ के लिए चरणी बनानी चाहिये, और नित्य प्रति पवित्र ताजा ठंडा जल भरना चाहिये, ऐसा करने से मनुष्य की “२१ पीढियाँ” तर जाती है।गाय उसी ब्राह्मण को दान देना चाहिये, जो वास्तव में गाय को पाले, और गाय की रक्षा सेवा करे, यवनों को और कसाई को न बेचे। अनाधिकारी को गाय दान देने से घोर पाप लगता है।नित्य प्रति गाय के परम पवित्र गोबर से रसोई लीपना और पूजा के स्थान को भी, गोमाता के गोबर से लीपकर शुद्ध करना चाहिये।गाय के दूध, घी, दही, गोबर और गौमूत्र, इन पाँचो को ‘पञ्चगव्यऽ के द्वारा मनुष्यों के पाप दूर होते है।कहते हैं गौ के “गोबर में लक्ष्मी जी” और “गौ मूत्र में गंगा जी” का वास होता है इसके अतिरिक्त दैनिक जीवन में उपयोग करने से पापों का नाश होता है, और गौमूत्र से रोगाणु नष्ट होते है।जिस देश में गौमाता के रक्त का एक भी बिंदु गिरता है, उस देश में किये गए योग, यज्ञ, जप, तप, भजन, पूजन , दान आदि सभी शुभ कर्म निष्फल हो जाते है।नित्य प्रति गौ की पूजा आरती परिक्रमा करना चाहिये। यदि नित्य न हो सके तो “गोपाष्टमी” के दिन श्रद्धा से पूजा करनी चाहिये।गाय यदि किसी गड्डे में गिर गई है या दलदल में फस गई है, तो सब कुछ छोडकर सबसे पहले गौमाता को बचाना चाहिये। गौ रक्षा में यदि प्राण भी देना पड़ जाये तो सहर्ष दे देने से गौलोक धाम की प्राप्ति होती है।यदि तीर्थ यात्रा की इच्छा हो, पर शरीर में बल या पास में पैसा न हो, तो गौ माता के दर्शन, गौ की पूजा और परिक्रमा करने से, सारे तीर्थो का फल मिल जाता है। गाय सर्वतीर्थमयी है। गौ की सेवा से घर बैठे ही ३३ करोड़ देवी – देवताओ की सेवा हो जाती है। ओर इसी गोमाता से हमे पंचगव्य प्राप्त होता है अब आपको इसकी जानकारी दूंगा क्या हैं पंचगव्य घृत ?
पंचगव्य घृत किस रोगों में काम आता हैं ??
आयुर्वेद में, पंचगव्य गाय से प्राप्त पांच महत्वपूर्ण पदार्थों, दूध, घी, दही मूत्र और गोबर का वर्णन करने के लिये प्रयुक्त शब्द हैं  पंचगव्य घृत, पंचगव्य के सभी पांच घटकों से तैयार किया जाता हैं । इसे यकृत रोग, बुखार, एनीमिया और एक टॅोनिक के रूप में प्रयोग किया जाता हैं । इसके सेवन से शरीर में ताकात आती हैं । यह पौष्टिक होने के साथ-साथ शरीर के भीतर की रूक्षता को दुर करता हैं ओर कब्ज़ से राहत देता है । यह पाचक और बस्ती को शुद्ध करता हैं । यह धातुक्षीणता को दूर करता है ओर शरीर को सबल बनाता है ।
*पंचगव्य घृत के घटक Ingredients of Panchgvya Ghrita*
- गोमय स्वरस (3.0721)
- क्षिर Milk - 3.0721
- दधि Curd - 3.072 kg
- गो मूत्र cow's urine - 3.0721
- घी Go ghirta - 768 g
पंचगव्य घृत के लाभ / फायदे (Benefits Of Panchgvya Ghrita)*
- यह यकृत की रक्षा करता है ।
- इसमे रक्त शोधन गुण हैं ।
- यह मुख्य रुप से तंत्रिका और मनोवैज्ञानिक रोगो में प्रयोग किया जाता हैं ।
- यह स्त्रोंतों को साफ करता हैं ।
- यह विशेष रुप से मिरगी, उन्माद / मनोविकृति ओर तंत्रिकाजन्य विकारों में अत्यन्त लाभप्रद है ।
- यह अत्यंत पौष्टिक है ।
- यह वजन, कान्ति, और पाचन को बढ़ाता है ।
- यह धातुओं को पुष्ट करता हैं ।
- यह पित्त विकार को दूर करता है ।
*पंचगव्य घृत के चिकित्सीय उपयोग*
- मिरगी
- पागलपन
- पीलिया
- मलेरिया / टाइफाइड, विषम ज्वर
- मनोभ्रंश, अवसाद और अल्जाइमर रोग
- ओबसेसिव कम्पलसिव डिसओडॅर
सेवन विधि और मात्रा Dosage Of Panchgvya Ghrita
- 5 ग्राम - 12 ग्राम दिन में दो बार, सुबह ओर शाम लें ।
- इसे गाय के दुध साथ लें ।
- यह डोक्टर द्वारा निर्देशित रुप में लें ।

Thursday, 14 September 2017

सफेद बालों से छुटकारा चाहते हैं तो खाने में शामिल करें ये फूड्स

अगर आपके बाल सफेद हो रहे हैं तो इन खाद्य-पदार्थों को अपने डाइट चार्ट में शामिल कीजिए और सफेद बालों से छुटकारा पाइए

आहार जो दूर करें बालों की सफेदी---असमय बाल सफेद होना-- आपको परेशान कर सकता है। इसके लिए आप तमाम तरह के उपाय करते हैं। लेकिन, इन सबके साथ ही अगर आप अपने आहार में कुछ चीजों को शामिल कर लें, तो आप वक्‍त से पहले पकते बालों की समस्‍या को दूर कर सकते हैं।

हरी पत्‍तेदार सब्जियां-- पत्‍तेदार सब्जियों में भरपूर मात्रा में विटामिन-बी पाया जाता है जो बालों को सफेद होने से बचाता है। विटामिन बी-6 और विटामिन बी-12 लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण करते हैं जिससे सिर में ऑक्‍सीजन जाता है। लेकिन बिटामिन बी की कमी से बालों को भरपूर मात्रा में ऑक्‍सीजन नही मिल पाता है, इसलिए विटामिन बी की कमी दूर करने के लिए पत्‍तेदार सब्जियों का सेवन कीजिए।

चॉकलेट- मेलेनिन के कारण बालों को रंग प्रदान करता है और मेलेनिन का उत्‍पादन शरीर में कॉपर की मात्रा पर निर्भर है। अगर शरीर में कॉपर की कमी है तो बाल सफेद हो जाते हैं। शरीर में कॉपर की कमी दूर करने के लिए स्‍वीट थेरेपी का सहारा लीजिए। कॉपरयुक्‍त खाद्य-पदार्थों का सेवन कीजिए, इसके लिए चॉकलेट, मशरूम और दाल खाइए।

स्‍ट्रॉबेरीज- स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी पाया जाता है, जो कोलेजन उत्पादन करता है। कोलेजन बढ़ती उम्र में बालों को सफेद होने से बचाता है। स्‍ट्रॉबेरी खाने में स्‍वादिस्‍ता तो होता ही साथ ही यह बालों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसलिए बालों को सफेद होने से बचाने के लिए पोषण और विटामिन युक्‍त आहार ज्‍यादा मात्रा में लीजिए।

अखरोट और बादाम- बादाम में भरपूर मात्रा में कॉपर और विटामिन-ई पाया जाता है। बाजार में मौजूद आलमंड के हेयर ऑयल भी बालों को सफेद होने से बचाते हैं। इसके अलावा अगर सुबह के नास्‍ते में बादाम का सेवन किया जाए तो बालों को सफेद होने से बचाया जा सकता है।

डेयरी उत्‍पाद- डेयरी उत्‍पादों में विटामिन बी प्रचुर मात्रा में होता है। विटामिन बी6 और बी12 लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे स्‍कैल्‍प में ऑक्‍सीजन और पोषक तत्‍वों की मात्रा बढ़ जाती है। लेकिन, फॉलिक एसिड और बॉयोटिन की कमी से बालों का रंग सफेद होने लगता है। साबुत अनाज, पास्‍ता, पॉल्‍ट्री उत्‍पाद, मीट, अंडा और हरी पत्‍तेदार सब्जियों में विटामिन बी प्रचुर मात्रा में होता है

आंवला- बालों को सफेद होने से बचाने के लिए आंवला श्रेष्‍ठ उत्‍पाद माना जाता है। आंवला बालों को काला करने और उन्‍हें असमय सफेद होने से रोकता है। यह बालों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं। रोजाना सुबह एक आंवला आपके बालों और पूरे शरीर की सेहत को ठीक रखता है।

करी पत्ता- करी पत्ता भी बालों को असमय सफेद होने से रोकता है। यह बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है। अपने आहार में करी पत्‍ते का इस्‍तेमाल करने के साथ-साथ आप इसे नारियल के तेल में उबाल भी सकते हैं। फिर वह तेल बालों की जड़ों में लगाने से भी बाल मजबूत बनते हैं।

सूरजमुखी के बीज- सूरजमुखी के बीजों में काफी मात्रा में मिनरल मौजूद होते हैं, जो शरीर को सही प्रकार से काम करने में मदद करते हैं। ये मिनरल मेलनिन के निर्माण और उसके स्‍तर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर आपके शरीर में इन मिनरल्‍स की कमी हो जाए, तो बाल सफेद हो सकते हैं।

Wednesday, 13 September 2017

गाय का घी बीमारियों में दवा ओर अमृत की तरह काम करता है

हिन्दू धर्म मे गाय को माँ का दर्जा दिया है ! गो मूत्र , गोबर , गो घृत  से आयुर्वेद मे बहुत सी ओषधि बनाई जाती है मगर अब तक तो आप यही जानते हो  कि देशी घी ही रोगों की सबसे बड़ी जड़ है? लेकिन यह सच नहीं है! गाय का घी स्‍वादिष्‍ट और सुगन्‍धित होने के साथ-साथ बीमारी को दूर करने और त्‍वचा के लिए भी बहुत गुणकारी होता है।

आज आप जानिए---- फायदेमंद है गाय का घी ज्यादातर लोग वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के डर से घी का सेवन करने से बचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाय का घी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है।  गाय का घी स्वादिष्ट और सुगन्धित होने के साथ-साथ किसी दवा से कम नहीं है। आयुर्वेद में तो गाय के घी को अमृत समान बताया गया है। अगर गाय के घी का सेवन नियमित रूप से किया जाये तो वजन तो नियंत्रित रहता ही है, साथ ही हर प्रकार की बीमारी से भी बचे रहते हैं। जिस प्रकार गाय के दूध में खूब सारी एनर्जी होती है उसी प्रकार देशी घी खाने वाले भी एनर्जी से भरपूर होते हैं। गाय का घी खाने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग प्रकार की चमक, शरीर में एनर्जी और मस्तिष्क तेज होता है। 

कोलेस्ट्रॉल कम करें- घी पर हुए शोध के अनुसार, इससे रक्त और आंतों में मौजूद कोलेस्ट्रॉल कम होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि घी से बाइलरी लिपिड का स्राव बढ़ जाता है। देशी घी शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को सही रखता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए अगर आप कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान है, तो अपने आहार में गाय के घी को शामिल करें।

पाचन शक्ति बढ़ाये- घी का स्मोकिंग पॉइंट दूसरे फैट की तुलना में बहुत अधिक है। यही कारण है कि पकाते समय आसानी से नहीं जलता। घी में स्थिर सेचुरेटेड बॉण्ड्स बहुत अधिक होते हैं, जिससे फ्री रेडिकल्स निकलने की आशंका बहुत कम होती है। घी की छोटी फैटी एसिड की चेन को शरीर बहुत जल्दी पचा लेता है। जिससे आपकी पाचन शक्ति अच्छी रहती है

दिल के लिए फायदेमंद- अब तक तो यही समझा जाता था कि देशी घी ही रोगों की सबसे बड़ी जड़ है? लेकिन यह सच नहीं है क्योंकि गाय का घी दिल समेत कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। दिल की नलियों में ब्लॉकेज होने पर गाय का घी एक ल्यूब्रिकेंट की तरह काम करता है। जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है, वह गाय का घी खाएं, इससे दिल मजबूत होता है।

त्‍वचा में निखार लाये- गाय के घी में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और चेहरे की चमक बरकरार रखता है। साथ ही यह त्वचा को मुलायम और नमी प्रदान करता है और त्वचा को नॉरिश करने के साथ-साथ ड्रायनेस को भी कम करता है और त्वचा की कांति बढ़ाता है। आप देशी घी से रोज चेहरे की मसाज कर सकते हैं

मेटाबॉल्जिम को सही रखें- देशी घी शरीर में जमा फैट को गला कर विटामिन में बदलने का काम करता है। इसमें चेन फैट एसिड कम मात्रा में होता है, जिससे आपका खाना जल्दी डाइजेस्ट होता है और मेटाबॉल्जिम सही रहता है। इसके अलावा खाने में देशी घी मिलाकर खाने से खाना जल्दी डाइजेस्ट होता है। यह मेटाबॉल्जिम प्रक्रिया को बढाता है

वजन को निय‍ंत्रित रखें- देशी घी में सीएलए होता है जो मेटाबॉल्जिम को सही रखता है। इससे वजन कंट्रोल में रहता है। सीएलए इंसुलिन की मात्रा को कम रखता है, जिससे वजन बढ़ने और शुगर जैसी दिक्कतें होने का खतरा कम रहता है। इसके अलावा यह हाइड्रोजनीकरण से नहीं बनाया जाता है, इसलिए देशी घी खाने से शरीर में एक्स्ट्रा फैट बनने का सवाल ही नहीं पैदा होता 

इम्यून सिस्टम मजबूत बनाये- देशी घी में विटामिन के2 पाया जाता है, जो ब्लड सेल में जमा कैल्शियम को हटाने का काम करता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। देसी घी इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे इन्फेक्शन से और बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है।

कैंसर से लड़े- देसी घी में सूक्ष्म जीवाणु, एंटी-कैंसर और एंटी-वायरल जैसे तत्व मौजूद होते हैं जो कई बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है। गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।

माइग्रेन की समस्‍या से बचाये- माइग्रेन में आमतौर पर सिर के आधे हिस्से में दर्द होता है और सिरदर्द के वक्त मितली या उलटी भी आ सकती है। इस समस्या से बचने के लिए गाय का घी आपकी मदद कर सकता है। दो बूंद गाय का देसी घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होता है। साथ ही गाय के घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म होती है, नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाता है।

भीगे हुए चने बादाम से भी ज्‍यादा फायदेमंद

बादाम से ज्‍यादा फायदेमंद है भीगे हुए चने- भीगे बादाम हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, यह बात तो हम सभी जानते हैं। लेकिन  भीगे चने भीगे बादाम से भी ज्‍यादा फायदेमंद होते है।  यह सच है  भीगे चने में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, फैट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। जिससे यह सस्‍ती चीज बड़ी से बड़ी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। साथ ही इससे खून साफ होता है जिससे सुंदरता बढ़ती है और यह दिमाग भी तेज करता है। अगर आप मोटापा कम करने की कोशिश कर रहे है तो नाश्‍ते में रोजाना भीगे चने का सेवन करें।

इम्‍यूनिटी में मजबूती--शरीर को सबसे ज्‍यादा पोषण भीगे काले चने से मिलते हैं। चनों में बहुत सारे विटामिन्स और क्लोरोफिल के साथ फास्फोरस आदि मिनरल्स होते हैं जिन्हें खाने से शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती है। रोजाना सुबह के समय भीगे चने खाने से आपको बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। इसके लिए काले चनों को रातभर भिगोकर रख लें और हर दिन सुबह दो मुट्ठी खाएं। कुछ दिनों में आपको फर्क महसूस होने लगेगा। 

डायबिटीज से बचाव-- अगर आप डायबिटीज से परेशान है तो अपने आहार में भीगे चनों को शामिल करें। 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है।

पेट की समस्‍याओं से राहत-- चनों को रातभर पानी में भिगो दें। फिर सुबह चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स करके खाये। चनों को इस तरह से खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।

एनर्जी से भरपूर--अगर आप पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहना चाहते हैं तो शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए भीगे चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं।

पुरुषों के लिए फायदेमंद-- सुबह खाली पेट काले चने खाना पुरुषों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर चनों को अच्‍छे से चबा-चबाकर खाएं। इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है और वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है। यानी पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।

आलूबुखारा त्‍वचा के लिए कमाल का

स्‍वाद में खट्टा मीठा और टेस्‍टी आलूबुखारा सेहत के साथ-साथ आपके चेहरे और बालों के लिए भी बहुत अच्‍छा होता हैं ! आलू बुख़ारा एक गुठलीदार फल है। आलू बुख़ारे लाल, काले, पीले और कभी-कभी हरे रंग के होते हैं। आलू बुख़ारों का ज़ायका मीठा या खट्टा होता है और अक्सर इनका पतला छिलका अधिक खट्टा होता है। इनका गूदा रसदार होता है और इन्हें या तो सीधा खाया जा सकता है या इनके मुरब्बे बनाए जा सकते हैं। इनके रस पर खमीर उठने पर आलू बुख़ारे की शराब भी बनाई जाती है। सुखाए गए आलू बुख़ारों को बहुत जगहों पर खाया जाता है और उनमें ऑक्सीकरण रोधी (ऐन्टीआक्सडन्ट) पदार्थ होते हैं जो कुछ रोगों से शरीर को सुरक्षित रखने में मददगार हो सकते हैं। आलू बुख़ारों की कई क़िस्मों में कब्ज़ का इलाज करने वाले (यानि जुलाब के) पदार्थ भी होते हैं।

चेहरे के लिए कमाल है आलूबुखारा- स्‍वाद में खट्टा मीठा और टेस्‍टी आलूबुखारा सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद होता है। लेकिन इसमें मौजूद प्रोटीन मिनरल और आयरन जैसे पोषक तत्‍वों के कारण आलूबूखारा शरीर के साथ-साथ चेहरे और बालों के लिए भी बहुत अच्‍छा माना जाता हैं। जी हां आलूबुखारे में विटामिन 'ए' और विटामिन 'सी' के साथ फाइबर और एंटीऑक्‍सीडेंट भी पाये जाते हैं जो आपकी त्‍वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

 आलूबुखारा आपकी त्‍वचा के लिए कितना फायदेमंद होता है---

मुंहासो के निशान हटाएं---आलूबुखारा चेहरे पर मुंहासों के दाग मिटाने के साथ चेहरे का कालापन भी दूर करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट के कारण यह दाग-धब्‍बे हटाने में मदद करता है। साथ ही यह चेहरे के ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ता है जिससे त्‍वचा में ग्‍लो आता है।

उम्र के असर को बेअसर करें--विटामिन्‍स से भरपूर होने के कारण आलूबुखारा चेहरे को बढ़ती उम्र के नुकसान से बचाता है। साथ ही इस फल में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट चेहरे पर असमय झुर्रियां पड़ने नहीं देता। अगर आप अपने चेहरे को लंबे समय तक जवां बनाए रखना चाहती है तो आलूबुखारे के गुदे से चेहरे की मसाज करें। या इसका मास्‍क बनाकर अपने चेहरे पर लगाएं। आलूबुखारे में मौजूद पौष्टिक तत्‍व न केवल चेहरे को असमय झुर्रियों से बचाते है बल्कि इससे चेहरे की झाइयां भी कम होती है।

त्‍वचा को चमकदार बनाएं--अगर आप त्‍वचा को चमकदार बनाना चाहते हैं तो अपने आहार में आलूबुखारे को शामिल करें। इसमें मौजूद विटामिन सी त्‍वचा को चमकदार और लचीला बनाते है। साथ ही यह चेहरे की रंगत निखारने के साथ आपको लंबे समय तक जवां भी बनाये रखता है। साथ ही अपने डाइट में आलूबुखारे  को शामिल करके आप धूप की खतरनाक किरणों से भी बच सकती हैं क्‍योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है।

बालों के लिए वरदान---आलूबुखारे में मौजूद विटामिन सी बालों की जड़ों में ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। आलूबुखारे के बीज को पीसकर पानी मिक्‍स करके बालों की जड़ों में लगाने डैंड्रफ और डैंड्रफ से होने वाली खुजली दूर हो जाती है। इसके अलावा आलूबुखारे में विटामिन और प्रोटीन की ज्‍यादा मात्रा बालों को मजबूत और घना बनाते है। साथ ही विटामिन ई बालों को झड़ने से भी रोकता है। साथ ही यह बालों के प्राकृतिक रंग को भी बरकरार रखता है।

बालों के लिए वरदान--आलूबुखारे में मौजूद विटामिन सी बालों की जड़ों में ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। आलूबुखारे के बीज को पीसकर पानी मिक्‍स करके बालों की जड़ों में लगाने डैंड्रफ और डैंड्रफ से होने वाली खुजली दूर हो जाती है। इसके अलावा आलूबुखारे में विटामिन और प्रोटीन की ज्‍यादा मात्रा बालों को मजबूत और घना बनाते है। साथ ही विटामिन ई बालों को झड़ने से भी रोकता है। साथ ही यह बालों के प्राकृतिक रंग को भी बरकरार रखता है

गठिया, मधुमेह और कोलेस्‍ट्रॉल से छुटकारा 1 कप अदरक के जूस से

एक कप अदरक के जूस के सेवन से सर्दी जुखाम, पेट की खराबी, गले के दर्द, जोडों के दर्द, मधुमेह, बढे हुए कोलेस्‍ट्रॉल यहां तक कि कैंसर तक से बचाव होता है। तो चलिए जानें कितना फायदेमंद है रोजाना एक कप अदरक का जूस पीना !

अदरक के जूस के फायदे---अदरक एक कमाल की हर्ब है, जिसके बड़े सारे स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। इसे भोजन बनाने से लेकर रोगों के इलाज तक में प्रयोग किया जाता है। यह ना सिर्फ  खाने का स्‍वाद बढ़ाता है बल्‍कि बीमारियों से भी निजात दिलाने में मदद करता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अदरक खाने के अलावा इसके जूस का सेवन करने के भी कई कमाल के फायदे होते हैं। अदरक का एक कप जूस पिने से कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके सेवन से सर्दी-जुखाम, पेट की खराबी, गले के दर्द, जोडों के दर्द, मधुमेह, बढे हुए कोलेस्‍ट्रॉल यहां तक कि कैंसर तक से बचाव होता है।  

कितना फायदेमंद है रोजाना एक कप अदरक का जूस पीना----

मधुमेह को नियंत्रित करे- अदरक में एंटी डायबिटिक गुण होते हैं, जो ब्‍लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। एक गिलास अदरक के जूस का सेवन आपके फास्‍टिंग ग्‍लूकोज लेवल को भी नियंत्रित कर सकता है।

कैंसर से बचाव में मददगार-- साबुत अदरक में कुछ ऐसे गुणकारी पदार्थ होते हैं, जिसमें एंटी कैंसर गुण होते हैं और वे कैंसर से बचाव में बेहद असरदार भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अदरक का जूस जहां एक ओ ग्‍लूकोज के स्तर को सामान्य बनाए रखता है वहीं, इससे कोलेस्‍ट्रॉल का स्तर भी कम करने में मदद मिलती है।

गठिया के दर्द में आराम -- एक शोध के अनुसार, अदरक में दर्द कम करने वाले गुण भी होते हैं। गठिया रोग और जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए इसका सेवन लाभदायक होता है। इसका जूस बनाने के लिए अदरक को धोकर इसके छोटे टुकड़े काट लें और जूसर में डाल कर पीसें और जूस निकाल लें। इस जूस में आप नींबू का रस और शहद भी मिला सकते हैं  !

दूब घास औषधीय गुणों से भरपूर

अरे घास री रोटी ही जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो। कहा जाता है कि महाराणा प्रताप ने वनों में भटकते हुए जिस घास की रोटियां खाई थीं, वह भी दूब घास से ही निर्मित थी। जीं हां दूब घास मनुष्यों के लिए पूर्ण पौष्टिक आहार है और इसे औषधि के रूप में विशेष तौर पर प्रयोग किया जाता है

 दूब घास के औषधीय गुण--- कहा जाता है कि महाराणा प्रताप ने वनों में भटकते हुए जिस घास की रोटियां खाई थीं, वह भी दूब घास से ही निर्मित थी। दूब या ‘दुर्वा’ वर्ष भर पाई जाने वाली घास है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग होने के कारण इस घास का हिंदु धर्म में बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। दूब घास संपूर्ण भारत में पाई जाती है। दूब घास पशुओं के लिए ही नहीं बल्कि मनुष्यों के लिए भी पूर्ण पौष्टिक आहार है। अनेक औषधीय गुणों की मौजूदगी के कारण आयुर्वेद में इसे ‘महाऔषधि’ में कहा गया है। दूब के पौधे की जड़ें, तना, पत्तियां सभी का चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार दूब का स्वाद कसैला-मीठा होता है। विभिन्न प्रकार के पित्‍त एवं कब्‍ज विकारों को दूर करने के लिए दूब का प्रयोग किया जाता है। दूब घास को पेट के रोगों, यौन रोगों, लीवर रोगों के लिए चमत्‍कारी माना जाता है। दूब में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आइए इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से इसके औषधीय गुणों के बारे में जानते हैं। 


रोगों में इसे लेने के उपाय-----  दूब का रस - 10-20 मिलीलीटर  , जड़ का चूर्ण - 3-6 ग्राम , पानी - 40-80 मिलीलीटर,पत्तियों का चूर्ण - 1-3 ग्राम  सबको मिलाकर इसका काढ़ा बनाकर पीयें। 


प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायें-----दूब घास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में मदद करती हैं। इसमें मौजूद एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबिल गुणों के कारण यह शरीर की किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा दूब घास पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण शरीर को एक्टिव और एनर्जीयुक्‍त बनाये रखने में बहुत मदद करती है। यह अनिद्रा रोग, थकान, तनाव जैसे रोगों में भी प्रभावकारी है।

त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी---इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-सेप्टिक गुणों के कारण यह त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं जैसे- खुजली, त्वचा पर चकत्‍ते ओर एक्जिमा आदि समस्‍याओं से राहत दिलाता है। दूब घास को हल्दी के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाने से समस्‍या से राहत मिलती है। इसके अलावा यह कुष्ठ रोग और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद करता है। दूब का रस पीने से बार-बार लगने वाली प्यास बूझ जाती है। इससे पेशाब खुलकर होने लगता है। इसके साथ ही ब्‍लड की अनावश्यक गर्मी शांत होकर त्‍वचा विकार दूर होने लगते हैं।

महिलाओं की समस्‍याओं से राहत दिलाये--दूब यू.टी.आई यानी यूरीन मार्ग के संक्रमण के उपचार में प्रभावकारी रूप से काम करती है। साथ ही प्रोलेक्टिन हॉर्मोन को उन्नत करने में मदद करने के कारण यह स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के भी लाभकारी होता है। इसके अलावा दूर्वा के प्रयोग से महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं जैसे- ल्‍यूकोरिया, बवासीर आदि से राहत मिलती है। समस्‍या होने पर दही के साथ दूब घास को मिलाकर सेवन करें।

एनीमिया दूर करें--दूब के रस को हरा रक्त कहा जाता है, क्‍योंकि इसे पीने से एनीमिया की समस्‍या को ठीक किया जा सकता है। दूब ब्‍लड को शुद्ध करती है एवं लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करती है जिसके कारण हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है। इसके अलावा यह आंखों के लिए भी अच्छा होता हैं क्‍योंकि इस पर नंगे पैर चलने से नेत्र ज्योति बढती है।

मानसिक रोगों में लाभकारी-- दूब ठंडी तासीर वाली औषधि है, इसलिए दूब का ताजा रस मिर्गी, हिस्टीरिया इत्यादि मानसिक रोगों में प्रयुक्त होता है। दूब के काढ़े से कुल्ले करने से मुंह के छाले मिट जाते हैं। दूब को पीसकर मस्तिष्‍क पर लेप करने से नकसीर भी बंद हो जाती है।

पाचन शक्ति बढ़ाये-- दूब घास के लगातार सेवन से पेट की बीमारी का खतरा काफी हद तक कम होता है और पाचन शक्ति भी बढ़ती है। यह कब्ज, एसिडटी से राहत दिलाने में भी मदद करती है। दूब का रस पीने से पित्त से होने वाली उल्टी ठीक हो जाता है

अन्‍य बीमारियों में लाभकारी--- दूब घास फ्लेवोनोइड्स का मुख्‍य स्रोत है, जिसके कारण यह अल्सर को रोकने में मदद करती है।दूब में ब्‍लड में ग्लूकोज के स्तर को कम करने की क्षमता होती है। जिससे डायबिटीज कंट्रोल में रहता है। दूब ब्‍लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर दिल को मजबूती प्रदान करती है। यह सर्दी-खांसी एवं कफ समस्‍याओं को दूर करने में मददगार है।

मधुमेह के मरीज घास पर नंगे पांव चलें, स्वस्थ रहें

 मधुमेह के मरीज अगर अपनी जीवनशैली को संतुलित नहीं बनाए रखते हैं ! यह कहने की जरूरत नहीं है कि तो इससे उन्हें कई किस्म की समस्या हो सकती है। खुद को स्वस्थ बनाए रखने के लिए न सिर्फ उन्हें डाक्टरों के निर्देशानुसार नियमित दवा खानी होती है बल्कि रेगुलर वाक भी करना होता है। जी, हां! वाकिंग यानी चहलकदमी मधुमेह के मरीजों के लिए एक लाभकारी उपचार है। इसके अलावा विशेषज्ञों का दावा है कि यदि मधुमेह के मरीज नंगे पांव घास पर चलते हैं, तो इसके उन्हें असरकारक फायदे देखने को मिलते हैं। सही मायनों में घास में नंगे पांव चलना सामान्य और स्वस्थ लोगों के लिए चलना भी लाभकारी है।

 नंगे पांव घास पर चलने के फायदे

बैलेंस इंप्रूव होता है---सामान्यतः हम अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हैं कि बमुश्किल ही नंगे पांव चलते हैं। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते हैं कि नंगे पांव चलने से हमारा बैलेंस बेहतर होता है। दरअसल घास पर नंगे पांव चलने से हमारा वस्टीबूलर सिस्टम बेहतर होता है, जिससे हमारा न्यूरल सर्किट्स रिमैप होता है। आमतौर पर देखने को मिलता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोग बैलेंस बना पाने में असमर्थ हो जाते हैं, ऐसे में अगर हम नंगे पांव चलें तो हमारा बैलेंस बेहतर होगा और उम्र का परछावा उसमें देखने को नहीं मिलता।

रक्त प्रवाह बेहतर होता है---डायबिटीज के मरीजों में अकसर पांव से जुड़ी समस्या देखने को मिलती है। लेकिन अगर वे नियमित घास पर नंगे पांव चलें तो इससे उनके पांव के तलवे का रक्त संचार बेहतर होगा। इससे चहलकदमी करने में सहजता भी महसूस होगी। असल में जैसा कि हम जानते हैं कि धरती में गुरुत्वाकर्षण क्षमता होती है जो कि हर चीज को अपनी ओर खींचती है। इसी सिद्धांत के तहत हमारा रक्त प्रवाह नीचे की ओर होता है, लेकिन चूंकि रक्त प्रवाह इस गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के उलट काम करने की कोशिश करता है, इससे हमारे सोल में रक्त प्रवाह बेहतर होने लगता है। यह स्थिति सामान्य लोगों और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी है।

हृदय संबंधी बीमारी में कमी---मधुमेह के मरीज किस कदर हृदय संबंधी बीमारी की चपेट में आने के खतरों से घिरे रहते हैं, यह बात जगजाहिर है। ऐसे में मधुमेह के मरीजों के चहलकदमी जीवनदायिनी की तरह होती है। चहलकदमी करने से हमारे पूरे शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे शरीर में रक्त के थक्के जमने की आशंका में कमी आती है। इसी का नतीजा है कि हृदय संबंधी बीमारियों में भी कमतरी होती है।

हड्डियां और मसल्स मजबूत होते हैं---नंगे पांव घास पर चलने से विनस रिटर्न में वृद्धि होती है, जिससे हमारी हड्डियां और मसल्स मजबूत होती हैं। इसके अलावा नियमित चहलकदमी करने से मसल्स फ्लेक्सिबल होती है। वाकिंग का असर सिर्फ पांव के मसल्स पर ही देखने को नहीं मिलता बल्कि पीठ और शरीर के पिछली हिस्से की हड्डियों में भी इसका असर साफ दिखता है। इससे हड्डियों में कैल्शियम में इजाफा होता है और सूरज की किरणों से हमें प्रत्यक्ष रूप में विटामिन डी भी मिलता है।

पांव से जुड़ी समस्या कम होती है-- हम ज्यादातर समय पांव में जूते ही पहने होते हैं, नतीजतन पंाव में कई किस्म की समस्या होने लगती है। कुछ लोगों में पांव सूजन, जलन, छिलना जैसी कई बीमारी हो जाती है। ऐसे में जब हम बिना जूतों के घास पर नंगे पांव चलते हैं तो इससे हमारे पांव को काफी आराम मिलता है। ठीक इसी तरह डायबिटीज मरीजों को भी अगर हल्की फुल्की पांव से जुड़ी कोई समस्या है तो उसका समाधान हो सकता है। हालंाकि डायबिटीज के मरीजों को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अगर उन्हें पांव से जुड़ी कोई परेशानी है तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें।

रक्त चाप संतुलित करता है-- मौजूदा समय में हमारी ऐसी लाइफस्टाइल हो चुकी है कि ज्यादातर लोग रक्तचाप से पीड़ित हैं। लेकिन अगर आप नियमित घास पर नंगे पांव चहलकदमी करते हैं तो इससे आपको रक्तचाव संतुलित होता है। नतीजतन आप स्ट्रोक, किडनी फेलियर जैसी बीमारी के खतरों से भी बाहर हो जाते हैं। डायबिटीज के मरीजों को भी यह लाभ पहुंचाता है क्योंकि इससे उनकी जीवनशैली काफी हद तक संतुलित हो जाती है !

Sunday, 10 September 2017

आवला के फायदे

लाख दुखों की एक दवा साबित होता रहा है धातृ फल आंवला। पाचन तंत्र से लेकर स्मरण शक्ति तक को दुरुस्त रखता है। यहां तक कि यह बुढ़ापे को भी हमसे दूर रखता है। आंवले को सुखा कर उसे पिसवाकर घर ही में आंवला चूर्ण बनाया जा सकता है या बाज़ार में भी विभिन्न ब्रांड के आंवला चूर्ण मिलते है !
 चिरयौवन व दीर्घायुष्य प्रदान करने वाला, रसायन द्रव्यों में सर्वश्रेष्ठ, आयुर्वेद में 'अमृतफल' नाम से सम्बोधित व औषधियों में श्रेष्ठ फल है – आँवला। आँवला सभी ऋतुओं में, सभी जगह सभी के लिए लाभदायी है।  आँवला विटामिन सी का राजा होने के कारण शरीर को रोगाणुओं के आक्रमण से बचाता है, शारीरिक वृद्धि में आने वाली रूकावटों को दूर करता है, यकृत के कार्यों को सुचारू रूप से चलने में मदद करता है, जीवनीशक्ति को बढ़ाता है तथा दाँतों व मसूढ़ों को मृत्युपर्यन्त सुदृढ़ बनाये रखता है। आंवला के चूर्ण में मिश्री पीस कर मिला ले. इस मिश्रण का एक चम्मच एक गिलास पानी में घोलकर सुबह शाम शरबत की तरह पी ले. यह अत्यंत स्वादिष्ट, पुष्टिदायक व उत्तम पित्तशामक है। यह सप्तधातुओं की वृद्धि कर शरीर को बलवान व वीर्यवान बनाता है। इसके सेवन से पित्तजनित विकार जैसे – आँखों की जलन, आंतरिक गर्मी, सिरदर्द आदि तथा उच्च रक्तदाब, रक्त व त्वचा के विकार, मूत्र एवं वीर्य संबंधी विकार नष्ट हो जाते हैं। यह एक अत्यन्त सुलभ, सस्ता एवं गुणकारी प्रयोग है।
नवशक्ति की प्राप्तिः एक महीने तक आँवले का चूर्ण नियमित रूप से घी, शहद और तिल का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से मनुष्य की बोलने की शक्ति बढ़ती है, शरीर कांतिमान हो उठता है तथा चिरयौवन प्राप्त होता है।
- इन्द्रियों की कार्यक्षमता में वृद्धिः आँवले का चूर्ण पानी, घी या शहद के साथ सेवन करने से जठराग्नि बढ़ती है, सुनने, सूँघने, देखने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है तथा दीर्घायुष्य प्राप्त होता है।
 हृदय की मजबूतीः सूखा आँवला एवं मिश्री चूर्ण सम मात्रा में एक-एक चम्मच सुबह शाम सेवन करने से हृदय मजबूत होता है। हृदय के वाल्व ठीक ढंग से कार्य करते हैं। हृदयरोगियों को यह प्रयोग कम से कम एक वर्ष तक नियंत्रित करना चाहिए।
 काले, घने, रेशम जैसे बालों के लिएः 20 सि 40 ग्राम सूखा आँवला 200 ग्राम पानी में रात को भिगो दें व सुबह उस पानी से बाल धो दें। आँवला-मिश्री का समभाग चूर्ण पानी के साथ सेवन करें। इस प्रयोग से बालों की सभी समस्याएँ खत्म हो जायेंगी व बाल चमचमाते नजर आयेंगे।
 गर्भवती स्त्रियों के लिएः नित्य 2 नग मुरब्बा सुबह खाली पेट गर्भवती महिला को खिलाने से प्रसव नैसर्गिक रूप से बिना किसी औषधि और चिकित्सकीय सहयोग के होता है तथा शिशु में तीव्र रोगप्रतिरोधक क्षमता पायी जाती है, जिसके प्रभाव से शिशु ओजस्वी व सुंदर होता है।
 समस्त यकृत रोगः आँवलों का 5 ग्राम चूर्ण सेवन करने से यकृत (लीवर) के दोष दूर हो जाते हैं।
 पेट के कीड़ेः ताजे आँवले का रस छः चम्मच और शुद्ध शहद 1 चम्मच मिलाकर एक सप्ताह तक सुबह शाम दें। इससे निश्चित रूप से कृमि मल के साथ बाहर आ जाते हैं।
 पेट के समस्त रोगः आँवला चूर्ण का सेवन करने से पेट के लगभग सभी रोगों में लाभ होता है। कब्ज दूर होती है. गोमूत्र के साथ करे तो और भी अधिक लाभ होता है.
 तेज व मेधा की वृद्धिः आँवला चूर्ण घी के साथ रोज सेवन करने से शरीर में तेज व मेधाशक्ति की वृद्धि होती है।
 दीर्घायु-प्राप्ति हेतुः 'गरूड़ पुराण' के अनुसार सौ वर्ष तक जीने के इच्छुक व्यक्ति को नित्य आँवला मिले जल से स्नान करना चाहिए।
 गर्मियों में त्वचा पर आंवले के चूर्ण को पानी में घोलकर लेप करने से शरीर की गर्मी निकल जाती है. त्वचा कांतिवान होती है.
बालों में भी यह लेप लगाने से बल चमकदार , काले होते है. रुसी दूर होती है.
- एडियों पर लेप लगाने से फटी एडियाँ ठीक होती है.
- आंवले के साथ हरा धनिया पीसकर खाने से भी आंखों के रोग में लाभ होता है.
- आंवला और चंदन का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर 1-1 चम्मच चूर्ण दिन में 3 बार शक्कर और शहद के साथ चाटने से गर्मी की वजह से होने वाली उल्टी बंद हो जाती है।
- लगभग 1 महीने तक प्रतिदिन सुबह और शाम को पीने से स्त्रियों को होने वाला श्वेतप्रदर नष्ट हो जाता है।
- आंवला चूर्ण से 2 गुनी मात्रा में गुड़ मिलाकर बेर के आकार की गोलियां बना लें। 3 गोलियां रोजाना लेने से जोड़ों का दर्द खत्म होता है।
- पिसा हुआ आंवला 1 चम्मच, 2 चम्मच शहद में मिला कर चाटें, ऊपर से दूध पीएं। इससे सदा स्वास्थ्य अच्छा रहता है। दिनभर प्रसन्नता का अनुभव होता है।
- यह दांतों , मसूढ़ों , हड्डियों को मज़बूत बनाता है.
- गर्मी से होने वाली शरीर की जलन दूर करता है.
- इतने सारे लाभ मिले इसलिए घर में अमृत फल आंवले का चूर्ण अवश्य रखे
-आंवला चूर्ण और हल्दी चूर्ण समान मात्र में लेकर भोजन के पश्चात ग्रहण करने से मधुमेह में लाभ प्राप्त होता है।
-हिचकी तथा उल्टी में आंवला रस, मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करें।
-पीलिया से परेशान हैं तो आंवले को शहद के साथ चटनी बनाकर सुबह-शाम सेवन करें।
-आंवला, रीठा व शिकाकाई के चूर्ण से बाल धोने पर बाल स्वस्थ व चमकदार होते हैं।
-आंवले का मुरब्बा शक्तिदायक व शीतलता प्रदान करने वाला होता है।
-स्मरण शक्ति कमजोर पड़ गई हो तो सुबह उठकर गाय के दूध के साथ दो आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए।
-एक गिलास ताजा पानी 25 ग्राम सूखे आंवले बारीक पिसे हुए व 25 ग्राम गुड़ मिलाकर 40 दिन तक दिन में 2 बार सेवन करने से गठिया रोग समाप्त हो जाता है।
-सूखे आंवले का चूर्ण मूली के रस में मिलाकर 40 दिन तक खाने से पथरी रोग से मुक्ति मिल जाएगी।
-आंवले के रस में थोड़ा कपूर मिलाकर उसका लेप मसूड़ों पर करने से दांत का दर्द ठीक हो जाए। दांतों के कीड़े भी मर जाएंगे।
-रात को सोते समय आंवले का चूर्ण एक गिलास गाय के दूध के साथ सेवन करने से कब्ज दूर हो जाएगी।
-सूखे आवले को पीसकर छलनी में छानकर आटे की भांति गूथकर रोज रात को सोते समय मुंह पर लेप करें और सुबह उठकर उसे धो दें। आपकाचेहरा चमक उठेगा।
-आंवले के रस में घी का छौंक देकर सेवन करने से ज्वर नष्ट हो जाता है।
-श्वेत प्रदर की समस्या में आंवले के चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करें, लाभ होगा।
-बूढ़े दिखते हैं तो सूखे आंवले का चूर्ण तथा तिल का चूर्ण सम भाग में मिलाकर घी व मधु के साथ 20 दिनों तक सेवन करें, लाभ होगा

Saturday, 9 September 2017

अनियमित मासिक धर्म के कारण लक्षण और उपचार

10 से 15 साल की आयु की लड़की के अंडाशय हर महीने एक विकसित डिम्ब (अण्डा) उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाहिका नली (फैलोपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस डिम्ब का पुरूष के शुक्राणु से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है। इसी स्राव को मासिक धर्म, रजोधर्म या माहवारी (Menstural Cycle or MC) कहते हैं।
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार। हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है
माहवारी सम्बन्धी समस्याएं—- ज्यादातर महिलाएं माहवारी (Menstrual cycle) की समस्याओं से परेशान रहती है लेकिन अज्ञानतावश या फिर शर्म या झिझक के कारण लगातार इस समस्या से जूझती रहती है। यहां समस्या बताने से पहले यह भी बता दें कि माहवारी है क्या. दरअसल दस से पन्द्रह साल की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक परिपक्व अण्डा या अण्डाणु पैदा करने लगता है। वह अण्डा डिम्बवाही थैली (फेलोपियन ट्यूब) में संचरण करता है जो कि अण्डाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है तो रक्त एवं तरल पदाथॅ से मिलकर उसका अस्तर गाढ़ा होने लगता है। यह तभी होता है जब कि अण्डा उपजाऊ हो, वह बढ़ता है, अस्तर के अन्दर विकसित होकर बच्चा बन जाता है। गाढ़ा अस्तर उतर जाता है और वह माहवारी का रूधिर स्राव बन जाता है, जो कि योनि द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है। जिस दौरान रूधिर स्राव होता रहता है उसे माहवारी अवधि/पीरियड कहते हैं। औरत के प्रजनन अंगों में होने वाले बदलावों के आवर्तन चक्र को माहवारी चक्र कहते हैं। यह हॉरमोन तन्त्र के नियन्त्रण में रहता है एवं प्रजनन के लिए जरूरी है। माहवारी चक्र की गिनती रूधिर स्राव के पहले दिन से की जाती है क्योंकि रजोधर्म प्रारम्भ का हॉरमोन चक्र से घनिष्ट तालमेल रहता है। माहवारी का रूधिर स्राव हर महीने में एक बार 28 से 32 दिनों के अन्तराल पर होता है। परन्तु महिलाओं को यह याद करना चाहिए कि माहवारी चक्र के किसी भी समय गर्भ होने की सम्भावना है।
पीड़ा दायक माहवारी क्या होती है?
पीड़ा दायक माहवारी मे निचले उदर में ऐंठनभरी पीड़ा होती है। किसी औरत को तेज दर्द हो सकता है जो आता और जाता है या मन्द चुभने वाला दर्द हो सकता है। इन से पीठ में दर्द हो सकता है। दर्द कई दिन पहले भी शुरू हो सकता है और माहवारी के एकदम पहले भी हो सकता है। माहवारी का रक्त स्राव कम होते ही सामान्यतः यह खत्म हो जाता है।
पीड़ादायक माहवारी का आप घर पर क्या उपचार कर सकते हैं?
निम्नलिखित उपचार हो सकता है कि आपको पर्चे पर लिखी दवाओं से बचा सकें। (1) अपने उदर के निचले भाग (नाभि से नीचे) गर्म सेक करें। ध्यान रखें कि सेंकने वाले पैड को रखे-रखे सो मत जाएं। (2) गर्म जल से स्नान करें। (3) गर्म पेय ही पियें। (4) निचले उदर के आसपास अपनी अंगुलियों के पोरों से गोल गोल हल्की मालिश करें। (5) सैर करें या नियमित रूप से व्यायाम करें और उसमें श्रोणी को घुमाने वाले व्यायाम भी करें। (6) साबुत अनाज, फल और सब्जियों जैसे मिश्रित कार्बोहाइड्रेटस से भरपूर आहार लें पर उसमें नमक, चीनी, मदिरा एवं कैफीन की मात्रा कम हो। (7) हल्के परन्तु थोड़े-थोड़े अन्तराल पर भोजन करें। (8) ध्यान अथवा योग जैसी विश्राम परक तकनीकों का प्रयोग करें। (9) नीचे लेटने पर अपनी टांगे ऊंची करके रखें या घुटनों को मोड़कर किसी एक ओर सोयें।
पीड़ादायक माहवारी के लिए डाक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?
यदि स्व-उपचार से लगातार तीन महीने में दर्द ठीक न हो या रक्त के बड़े-बड़े थक्के निकलते हों तो डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यदि माहवारी होने के पांच से अधिक दिन पहले से दर्द होने लगे और माहवारी के बाद भी होती रहे तब भी डाक्टर के पास जाना जाहिए।
माहवारी से पहले की स्थिति के क्या लक्षण हैं?
माहवारी होने से पहले (पीएमएस) के लक्षणों का नाता माहवारी चक्र से ही होता है। सामान्यतः ये लक्षण माहवारी शुरू होने के 5 से 11 दिन पहले शुरू हो जाते हैं। माहवारी शुरू हो जाने पर सामान्यतः लक्षण बन्द हो जाते हैं या फिर कुछ समय बाद बन्द हो जाते हैं। इन लक्षणों में सिर दर्द, पैरों में सूजन, पीठ दर्द, पेट में मरोड़, स्तनों का ढीलापन अथवा फूल जाने की अनुभूति होती है।
पी.एम.एस. (माहवारी से पहले बीमारी) के कारण क्या हैं?
पी.एम.एस. का कारण जाना नहीं जा सका है। यह अधिकतर 20 से 40 वर्षों की औरतों में होता है, एक बच्चे की मां या जिनके परिवार में कभी कोई दबाव में रहा हो, या पहले बच्चे के होने के बाद दबाव के कारण कोई महिला बीमार रही हो- उन्हें होता है।
पी.एम.एस (माहवारी के पहले की बीमारी) का घर पर कैसे इलाज हो सकता है?
पी.एम.एस के स्व- उपचार में शामिल है-
  • (1) नियमित व्यायाम – प्रतिदिन 20 मिनट से आधे घंटे तक, जिसमें तेज चलना और साईकिल चलाना भी शामिल है।
  • (2) आहारपरक उपाय साबुत अनाज, सब्जियों और फलों को बढ़ाने तथा नमक, चीनी एवं कॉफी को घटाने या बिल्कुल बन्द करने से लाभ हो सकता है।
  • (3) दैनिक डायरी बनायें या रोज का रिकार्ड रखें कि लक्षण कैसे थे, कितने तेज थे और कितनी देर तक रहे। लक्षणों की डायरी कम से कम तीन महीने तक रखें। इससे डाक्टर को न केवल सही निदान ढ़ंढने मे मदद मिलेगी, उपचार की उचित विधि बताने में भी सहायता मिलेगी।
  • (4) उचित विश्राम भी महत्वपूर्ण है।
माहवारी के स्राव को कब भारी माना जाता है?
यदि लगातार छह घन्टे तक हर घंटे सैनेटरी पैड स्राव को सोख कर भर जाता है तो उसे भारी पीरियड कहा जाता है। भारी माहवारी के स्राव के सामाय कारण क्या हैं?
भारी माहवारी स्राव के कारणों में शामिल है –
(1) गर्भाषय के अस्तर में कुछ निकल आना।
(2) जिसे अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्त स्राव कहा जाता है। जिस की व्याख्या नहीं हो पाई है।
(3) थायराइड ग्रन्थि की समस्याएं
(4) रक्त के थक्के बनने का रोग
(5) अंतरा गर्भाषय उपकरण
(6) दबाव।
लम्बा माहवारी पीरियड किसे कहते हैं?
लम्बा पीरियड वह है जो कि सात दिन से भी अधिक चले। लम्बेमाहवारी पीरियड के सामान्य के कारण क्या हैं?(1) अण्डकोष में पुटि (2) कई बार कारण पता नहीं चलता तो उसे अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्त स्राव कहते हैं (3) रक्त स्राव में खराबी और थक्के रोकने के लिए ली जाने वाली दवाईयां (4) दबाव के कारण माहवारी पीरियड लम्बा हो सकता है।
अनियमित माहवारी पीरियड क्या होता है?
अनियमित माहवारी पीरियड वह होता है जिसमें अवधि एक चक्र से दूसरे चक्र तक लम्बी हो सकती है, या वे बहुत जल्दी-जल्दी होने लगते हैं या असामान्य रूप से लम्बी अवधि से बिल्कुल बिखर जाते हैं। किशोरावस्था के पहले कुछ वर्षों में अनियमित पीरियड़ होना क्या सामान्य बात है?हां, शुरू में पीरियड अनियमित ही होते हैं। हो सकता है कि लड़की को दो महीने में एक बार हो या एक महीने में दो बार हो जाए, समय के साथ-साथ वे नियमित होते जाते हैं।
अनियमित माहवारी के कारण क्या है?
जब पीरियड असामान्य रूप में जल्दी-जल्दी होते हैं तो उनके कारण होते हैं-
(1) अज्ञात कारणों से इन्डोमिट्रोसिस हो जाता है जिससे जननेद्रिय में पीड़ा होती है और जल्दी-जल्दी रक्त स्राव होता है।
(2) कभी-कभी कारण स्पष्ट नहीं होता तब कहा जाता है कि महिला को अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्तस्राव है।
(3) अण्डकोष की पुष्टि
(4) दबाव।
सामान्य पांच दिन की अपेक्षा अगर माहवारी रक्त स्राव दो या चार दिन के लिए चले तो चिन्ता का कोई कारण होता है?
नहीं, चिन्ता की कोई जरूरत नहीं। समय के साथ पीरियड का स्वरूप बदलता है, एक चक्र से दूसरे चक्र में भी बदल जाता है।
भारी, लम्बे और अनियमित पीरियड होने पर क्या करना चाहिए?
(1) माहवारी चक्र का रिकॉर्ड रखें- कब खत्म हुए, कितना स्राव हुआ (कितने पैड में काम में आए उनकी संख्या नोट करें और वे कितने भीगे थे) और अन्य कोई लक्षण आप ने महसूस किया हो तो उसे भी शामिल करें।
(2) यदि तीन महीने से ज्यादा समय तक समस्या चलती रहे तो डाक्टर से परामर्श करें।
माहवारी का अभाव क्या होता है?
यदि 16 वर्ष की आयु तक माहवारी न हो तो उसे माहवासी अभाव कहते हैं। कारण है-
(1) औरत के जनन तंत्र में जन्म से होने वाला विकास
(2) योनि (योनिच्छद) के प्रवेशद्वारा की झिल्ली में रास्ते की कमी
(3) मस्तिष्क की ग्रन्थियों में रोग।
मासिक धर्म अनियमित होने या बिलकुल न होने के कारण—–
Reasons for missed periods and irregular periods
पीरियड क्या है? मासिक धर्म के चक्र की अवधि आमतौर पर औसत रूप से निकाली जाती है। एक औसत के मुताबिक़ हर 28 दिनों के अंतराल में एक महिला के पीरियड्स (periods) होने चाहिए। इसमें 2 से 3 दिन आगे पीछे अवश्य हो सकते हैं, और ऐसा होना किसी ख़ास चिंता का विषय भी नहीं होता। पर अगर यह अंतराल इससे ज़्यादा बढ़ गया तो इसका मतलब हुआ कि आपके मासिक धर्म की प्रक्रिया अनियमित हो गयी है। ऐसा देखा गया है कि बच्चे के जन्म के समय के दौरान 30% महिलाओं के मासिक धर्म की प्रक्रिया अनियमित हुई है। यह आमतौर पर कोई समस्या नहीं है, पर यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से आपकी स्थिति गंभीर है। अगर आप अनियमित रूप से होने वाले मासिक धर्म से पीड़ित हैं तो ये साफ़ दर्शाता है कि आपके मासिक धर्म में संतुलन का अभाव है। असल में ज़्यादातर अनियमित मासिक धर्म कोई नुकसान नहीं पहुंचाते और शरीर के लिए कोई ज़्यादा घातक भी नहीं होते।
पीरियड टिप्स – आपके पीरियड्स अनियमित कैसे होते हैं? (How exactly is your periods irregular?)
• मासिक धर्म का चक्र तब अनियमित माना जाता है, जब यह 21 दिनों के अंतराल के पहले हो जाए।
• यह तब भी अनियमित माना जाता है, जब यह 8 दिनों से ज्यादा चले।
• चाहे आपके पीरियड्स छूटे हों, जल्दी हो गए हों या फिर देर से ही क्यों ना हो रहे हों, इन सबको अनियमित पीरियड्स की ही श्रेणी में रखा जाता है।
छूटे हुए और अनियमित पीरियड्स के कारण (Reason form missed and irregular periods)
गर्भावस्था (Pregnancy)
मासिक धर्म के अनियमित रूप से होने के पीछे गर्भावस्था भी एक कारण हो सकता है। आप निश्चित रूप से गर्भावस्था के समय मासिक धर्म कर ना होने का अनुभव करेंगी पर इसमें चिंता की कोई बात नहों होती और यह बिलकुल स्वास्थ्यवर्धक होता है। प्रसव काल के बाद का समय भी आपको चिंतित कर सकता है जब आप भारी मात्रा में रक्तपात या इस जैसी किसी अन्य समस्या का सामना करती हैं।
पीरियड की समस्या – गर्भनिरोधक गोलियां (Birth control pills)
गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से आपके मासिक धर्म की प्रक्रिया अनियमित होती है। ऐसा करीब 2 महीनों तक हो सकता है, पर आपको कुछ समय के लिए ऐसी स्थिति से गुज़रना पड़ता है। कुछ समय के लिए आपका खून भी निकल सकता है,हालांकि यह सामान्य पीरियड्स की तरह बिलकुल नहीं होता। इन गोलियों की वजह से आपके पीरियड्स लम्बे समय तक छूट भी सकते हैं, परन्तु अंत में जाकर ये नियंत्रित हो जाता है।
मासिक धर्म का न आना – हॉर्मोन का असंतुलन (hormonal imbalance)
मासिक धर्म का अनियमित होना,रुक रुक क़र होना,भारी मात्रा में रक्तपात और खून के थक्के जमना शरीर के हॉर्मोन्स के असंतुलन की वजह से होता है और हॉर्मोन्स के इस असंतुलन को ठीक भी किया जा सकता है। मासिक धर्म की शुरुआत में हॉर्मोन्स को शरीर में हो रहे परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने में वर्षों लग जाते हैं और तब कहीं जाकर मासिक धर्म के होने की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है। आप इसकी वजह से अपने मासिक धर्म के अंत में भी अनियमित मासिक धर्म का अनुभव कर सकती हैं। अतः अगर आपका मासिक धर्म अनियमित है तो आपको ज़्यादा चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पीरियड की समस्या – पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome (PCOS)
यह एक डॉक्टरी समस्या है, जिसकी शिकार कोई भी महिला हो सकती है। यह उन महिलाओं के लिए काफी सामान्य है, जिनकी जीवनशैली अनियमित है तथा जिनका वज़न काफी ज़्यादा है। इस स्थिति के अंतर्गत महिलाओं के अंडाशय (ovary) में छोटे सिस्ट्स (cysts) पैदा हो जाते हैं और ये सामान्य अण्डोत्सर्ग की प्रक्रिया को जटिल बना देते हैं। इस समस्या की शिकार महिलाओं का मासिक धर्म चक्र काफी अनियमित होता है। इससे बांझपन की समस्या तथा मधुमेह और दिल की अन्य बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
पीरियड्स की समस्या – उम्र (Age)
जब महिलाएं पीरियड्स के शुरूआती महीनों में होती हैं, तो इसका नियमित रूप से ना होना बिलकुल सामान्य है। आपके शरीर को नए परिवर्तनों के अनुसार खुद को ढालने और संतुलन बनाने में थोड़ा सा समय लगता है। कुछ महिलाओं को इस परिवर्तन का आदि होने में कई साल लग जाते हैं। दूसरी तरफ ऐसी महिलाएं, जो रजोनिवृत्ति (menopause) के समय के करीब पहुँच गयी हैं, पीरियड्स के छूटने, हलके या भारी पीरियड्स का अनुभव कर सकती हैं।
मासिक धर्म जल्दी होने के तरीके (period regular karne ke tips)
मासिक धर्म में देरी – गर्भनिरोधक गोलियां (Contraceptive pills): गर्भनिरोधक गोलियों से ना सिर्फ गर्भवती होने के डर से छुटकारा मिलता है, बल्कि पीरियड्स भी जल्दी होते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ये हमारे शरीर के हॉर्मोन्स को नियंत्रित करते हैं। 35 वर्ष से ज़्यादा की महिलाओं को इन दवाओं का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह कर लेनी चाहिए। ऐसा करने से किसी भी समस्या को समय रहते दूर किया जा सकता है।
अनियमित मासिक धर्म – विटामिन सी (Vitamin C): इससे पीरियड्स जल्दी होते हैं, क्योंकि ये प्रोजेस्टेरोन (progesterone) की कमी कर देता है। इससे आप इन्हें अपने शरीर में प्राप्त नहीं कर पाती, क्योंकि इससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
माहवारी की जानकारी – जड़ीबूटी (Herbs): अदरक और अजवायन ऐसे दो तत्व हैं, जिनकी मदद से आपके पीरियड्स जल्दी होते हैं। ये गर्भाशय को फैलाने में मदद करते हैं, जिससे द्रव्य आसानी से निकलता है। यह आपके शरीर की हॉर्मोन की समस्याओं को भी नियंत्रित कर देते हैं, जो कि देर से पीरियड्स होने का कारण होते हैं। अपनी चाय में अदरक या अजवायन का मिश्रण करें। इसे सुबह एक बार और रात को एक बार पियें

Thursday, 7 September 2017

अस्थमा (दमा)

अस्थमा (दमा)  श्वसन मार्ग का एक आम जीर्ण सूजन disease वाला रोग है जिसे चर व आवर्ती लक्षणों, प्रतिवर्ती श्वसन बाधा और श्वसनी-आकर्ष से पहचाना जाता है। आम लक्षणों में घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न और श्वसन में समस्याशामिल हैं।

दमा फेफड़ों को खासा प्रभावित करता है। दमा के कारण व्यक्ति को श्वसन संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। दमा सिर्फ युवाओं और वयस्कों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। हालांकि अस्‍थमा के इलाज के लिए इनहेलर दिया जाता है लेकिन इनहेलर के दुष्‍प्रभाव भी होते हैं। इन सबके अलावा सवाल ये उठता है कि क्या दमा के प्रकार अलग-अलग होते हैं। बच्चों और बड़ों में होने वाला अस्थमा एक ही प्रकार का होता है। ये आपके लिए जानना बहुत जरूरी हैं। 
 जाने दमा के तमाम प्रकारों के बारे में----  
  • एलर्जिक अस्थमा – एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी है जैसे धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही आपको दमा हो जाता है या फिर मौसम परिवर्तन के साथ ही आप दमा के शिकार हो जाते हैं।
  • नॉनएलर्जिक अस्थमा- इस तरह के अस्थमा का कारण किसी एक चीज का एक्सिक्ट्रीम पर जाने से ऐसा होता है। जब आप बहुत अधिक तनाव में हो  या बहुत तेज-तेज हंस रहे हो, आपको बहुत अधिक सर्दी लग गई हो या बहुत अधिक खांसी-जुकाम हो। 
  • मिक्सड अस्थमा- इस प्रकार का अस्थमा किन्हीं भी कारणों से हो सकता है। कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से तो है तो कई बार नॉन एलर्जिक कारणों से। इतना ही नहीं इस प्रकार के अस्थमा के होने के कारणों को पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता है।
  • एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा- कई लोगों को एक्सरसाइज या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है तो कई लोग जब अपनी क्षमता से अधिक काम करने लगते हैं तो वे अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।
  • कफ वेरिएंट अस्थमा- कई बार अस्थमा का कारण कफ होता है। जब आपको लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा अटैक पड़ जाता है।
  • ऑक्यूपेशनल अस्थमा- ये अस्थमा अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। नियमित रूप से लगातार आप एक ही तरह का काम करते हैं तो अकसर आपको इस दौरान अस्थमा अटैक पड़ने लगते हैं या फिर आपको अपने कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करता जिससे आप अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।
  • नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा- ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है यानी जब आपको अकसर रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझना चाहिए कि आप नॉक्टेर्नल अस्थमा के शिकार हैं।
  • मिमिक अस्थमा- जब आपको कोई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कोई बीमारी जैसे निमोनिया, कार्डियक जैसी बीमारियां होती हैं तो आपको मिमिक अस्थमा हो सकता है। आमतौर पर मिमिक अस्थमा तबियत अधिक खराब होने पर होता है।
  • चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा- ये अस्थमा का वो प्रकार है जो सिर्फ बच्चों को ही होता है। अस्‍थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है तो बच्चा इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है। ये बहुत रिस्की नहीं होता लेकिन इसका सही समय पर उपचार जरूरी है।
  • एडल्ट ऑनसेट अस्थमा- ये अस्थमा युवाओं को होता है। यानी अकसर 20 वर्ष की उम्र के बाद ही ये अस्थमा होता है। इस प्रकार के अस्थमा के पीछे कई एलर्जिक कारण छुपे होते हैं। हालांकि इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहने पर होता है

अस्थमा के घरेलू उपचार (Home Remedies For Asthma)


  • लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
  • अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।
  • अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है।
  • दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है।
  • 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
  • 180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।
  • मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।
  • एक पका केला छिलका लेकर चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक छोटा चम्मच दो ग्राम कपड़ा छान की हुई काली मिर्च भर दें। फिर उसे बगैर छीले ही, केले के वृक्ष के पत्ते में अच्छी तरह लपेट कर डोरे से बांध कर 2-3 घंटे रख दें। बाद में केले के पत्ते सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की उपर का पत्ता जले। ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें।