Sunday, 6 December 2020

कालीमिर्च के फायदे--उत्तम जैन (प्राकृतिक चिकित्सक)

काली मिर्च खाने के ये फायदे जानकर हैरान हो जाएंगे आप

काली मिर्च खाने में एक अलग स्वाद ला देती है. इसलिए तो इसे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है. काली मिर्च सिर्फ खानों में स्वाद बढ़ाने के काम ही नहीं आती है बल्कि इससे सर्दियों में होने वाली खांसी, जुकाम और इसके साथ ही कई बीमारियां का ईलाज घर बैठे हो जाता है. लेकिन काली मिर्च का ज्यादा सेवन आपकी सेहत को नुकसान दे सकता है. इसलिए हर दिन दो से तीन काली मिर्च आपके शरीर के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित होंगी. आयुर्वेद में काली मिर्च को औषधि बताया गया है. आगे पढ़िए काली मिर्च के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में...

सर्दी रहे दूर
काली मिर्च का सेवन करने से सर्दी के मौसम में होने वाली खांसी और जुकाम से आपको राहत मिलती है. साथ ही इसके सेवन से आपका गला भी साफ रहता है. इतना ही नहीं कई लोगों को जुकाम के कारण बाल झड़ने की समस्या हो जाती है, इससे भी आपको आराम मिलता है. काली मिर्च का सेवन कई प्रकार की बीमारियों से आपको राहत देती है.

चर्म रोग दूर करें
यदि आपके शरीर पर फोड़ा या फुंसी होने की आम समस्या है तो काली मिर्च को घिसकर फोड़े वाली जगह पर लगा लें. इससे आपको कम समय में आराम मिल जाएगा. इसके अलावा मुंह पर होने वाले मुहांसों से भी काली मिर्च राहत देती है. हालांकि इसे लगाना आपके लिए थोड़ा परेशान कर सकता है लेकिन तेजी से आराम मिलेगा.

टेंशन होती है दूर
काली मिर्च में पिपराइन मौजूद होती है और उसमें एंटी-डिप्रेसेंट के गुण होते है. जिस कारण काली मिर्च लोगों की टेंशन और डिप्रेशन को दूर करने में मदद करती है. पुराने लोग काली मिर्च के सेवन को काफी तरजीह देते थे.

दांतों के लिए फायदेमंद
काली मिर्च का सेवन दांतों से जुड़ी समस्याओं से राहत देता है. काली मिर्च से मसूड़ों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है. यदि आप काली मिर्च, माजूफल और सेंधा नमक को मिलाकर चूर्ण बनाकर कुछ बूंद सरसों के तेल में मिलाकर दांतों और मसूड़ों में लगाकर आधे घंटे बाद मुंह साफ कर लें. इससे आपके दांत और मसूड़ों में दर्द होने वाली समस्या भी दूर हो जाएगी.

हिचकी दूर करें
हरे पुदीने की 30 पत्ती, 2 चम्मच सौंफ, मिश्री और काली मिर्च को पीसकर एक गिलास पानी में उबाल लें. इस मिश्रण को पीने से हिचकी समस्या दूर हो जाती है. 5 काली मिर्च को जलाकर पीसकर बार-बार सूंघने से हिचकी की समस्या दूर हो जाती है.

गैस और एसिडिटी से फायदा
आधुनिक जीवनशैली के बीच गैस और एसिडिटी की समस्या आम है. यदि आपको भी यह परेशानी है तो नींबू के रस में काला नमक और काली मिर्च का पाउडर मिलाकर चुटकी भर लें. गैस से होने वाले दर्द में आपको तुरंत आराम मिल जाएगा.

पेट के कीड़ों को दूर करें
काली मिर्च के पाउडर को खाने में इस्‍तेमाल करने से पेट में कीडों की समस्या दूर होती है. इसके अलावा काली मिर्च के साथ किशमिश खाने से भी पेट के कीड़ों की समस्‍या से छुटकारा मिलता है.

कैंसर से बचाव
महिलाओं के लिए काली मिर्च खाना बहुत फायदेमंद होता है. कालीमिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, फ्लेवोनॉयड्स, कारोटेन्स और अन्य एंटी -ऑक्सीडेंट होता है, जिससे महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है.

काली मिर्च खाने के ये फायदे जानकर हैरान हो जाएंगे आप

काली मिर्च खाने में एक अलग स्वाद ला देती है. इसलिए तो इसे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है. काली मिर्च सिर्फ खानों में स्वाद बढ़ाने के काम ही नहीं आती है बल्कि इससे सर्दियों में होने वाली खांसी, जुकाम और इसके साथ ही कई बीमारियां का ईलाज घर बैठे हो जाता है. लेकिन काली मिर्च का ज्यादा सेवन आपकी सेहत को नुकसान दे सकता है. इसलिए हर दिन दो से तीन काली मिर्च आपके शरीर के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित होंगी. आयुर्वेद में काली मिर्च को औषधि बताया गया है. आगे पढ़िए काली मिर्च के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में...

सर्दी रहे दूर
काली मिर्च का सेवन करने से सर्दी के मौसम में होने वाली खांसी और जुकाम से आपको राहत मिलती है. साथ ही इसके सेवन से आपका गला भी साफ रहता है. इतना ही नहीं कई लोगों को जुकाम के कारण बाल झड़ने की समस्या हो जाती है, इससे भी आपको आराम मिलता है. काली मिर्च का सेवन कई प्रकार की बीमारियों से आपको राहत देती है.

चर्म रोग दूर करें
यदि आपके शरीर पर फोड़ा या फुंसी होने की आम समस्या है तो काली मिर्च को घिसकर फोड़े वाली जगह पर लगा लें. इससे आपको कम समय में आराम मिल जाएगा. इसके अलावा मुंह पर होने वाले मुहांसों से भी काली मिर्च राहत देती है. हालांकि इसे लगाना आपके लिए थोड़ा परेशान कर सकता है लेकिन तेजी से आराम मिलेगा.

टेंशन होती है दूर
काली मिर्च में पिपराइन मौजूद होती है और उसमें एंटी-डिप्रेसेंट के गुण होते है. जिस कारण काली मिर्च लोगों की टेंशन और डिप्रेशन को दूर करने में मदद करती है. पुराने लोग काली मिर्च के सेवन को काफी तरजीह देते थे.

दांतों के लिए फायदेमंद
काली मिर्च का सेवन दांतों से जुड़ी समस्याओं से राहत देता है. काली मिर्च से मसूड़ों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है. यदि आप काली मिर्च, माजूफल और सेंधा नमक को मिलाकर चूर्ण बनाकर कुछ बूंद सरसों के तेल में मिलाकर दांतों और मसूड़ों में लगाकर आधे घंटे बाद मुंह साफ कर लें. इससे आपके दांत और मसूड़ों में दर्द होने वाली समस्या भी दूर हो जाएगी.

हिचकी दूर करें
हरे पुदीने की 30 पत्ती, 2 चम्मच सौंफ, मिश्री और काली मिर्च को पीसकर एक गिलास पानी में उबाल लें. इस मिश्रण को पीने से हिचकी समस्या दूर हो जाती है. 5 काली मिर्च को जलाकर पीसकर बार-बार सूंघने से हिचकी की समस्या दूर हो जाती है.

गैस और एसिडिटी से फायदा
आधुनिक जीवनशैली के बीच गैस और एसिडिटी की समस्या आम है. यदि आपको भी यह परेशानी है तो नींबू के रस में काला नमक और काली मिर्च का पाउडर मिलाकर चुटकी भर लें. गैस से होने वाले दर्द में आपको तुरंत आराम मिल जाएगा.

पेट के कीड़ों को दूर करें
काली मिर्च के पाउडर को खाने में इस्‍तेमाल करने से पेट में कीडों की समस्या दूर होती है. इसके अलावा काली मिर्च के साथ किशमिश खाने से भी पेट के कीड़ों की समस्‍या से छुटकारा मिलता है.

कैंसर से बचाव
महिलाओं के लिए काली मिर्च खाना बहुत फायदेमंद होता है. कालीमिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, फ्लेवोनॉयड्स, कारोटेन्स और अन्य एंटी -ऑक्सीडेंट होता है, जिससे महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है.

आयुर्वेद अपनाये रोगो को दूर भगाए :लिवर में सूजन और गर्मी : जानिये इसका इलाज और बचने के उपाय_

आयुर्वेद अपनाये रोगो को दूर भगाए :लिवर में सूजन और गर्मी : जानिये इसका इलाज और बचने के उपाय

 

जिगर क्या है
 
जिगर को अंग्रेजी भाषा में लिवर (Liver) कहते है| लिवर हमारे शरीर का मुख्य और सबसे बड़ा अंग है| लिवर लाल भूरे रंग का होता है और यह पेट में दाएं हिस्से में होता है| लिवर का वजन 2.5 से लेकर 3 पौंड तक होता है| जिगर हमारे शरीर में होने वाली अनेक प्रकार की क्रियाओं को अपने कण्ट्रोल में रखता है| इसी कारण से लिवर के खराब होने पर शरीर की अनेक प्रकार की क्रियाये सही तरीके से काम करना बंद कर देती है| लिवर में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत इलाज करा लेना चाहिए, क्योंकि लिवर में चलने वाली प्रॉब्लम अनेक प्रकार के रोगो को जन्म दे सकती है|

लिवर शरीर का अहम हिस्सा है, इसीलिए लिवर में किसी भी प्रकार का संक्रमण, दर्द, सूजन या कोई अन्य बीमारी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए| लिवर से जुडी किसी भी समस्या को नजरअंदाज करना आपके लिए बहुत खतरनाक हो सकता है| इस पोस्ट में हम आपको लिवर की सूजन, लिवर की खराबी और लिवर की गर्मी दूर करने के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय बताएंगे

*लिवर की सूजन क्या है*

लीवर शरीर के मुख्य अंगो में से एक है| कई बार गलत आदतों, गलत दवा या कई प्रकार की दवा के सेवन से लीवर में सूजन आ जाती है| लीवर शरीर के 500 से अधिक काम को करने में काम आता है और यह शरीर की बड़ी ग्रंथि है| लीवर को यकृत और कलेजा आदि नामो से भी जाना जाता है लीवर विषैले पदार्थो को शरीर से बाहर निकालता है, शरीर को ऊर्जा देता है और भोजन पचाने जैसे शरीर के मुख्य काम करता है|

लिवर की सूजन का इलाज करने से पहले यह जान लेना चाहिए, कि लिवर शरीर का मुख्य हिस्सा क्यों है और इस शरीर में किस प्रकार और क्या क्या काम करता है| आइये जाने लिवर की सूजन और लिवर से जुडी अन्य प्रॉब्लम के इलाज के बारे में विस्तार से|

*लिवर के कार्य क्या क्या है*

लिवर शरीर के मुख्य अंगो में से एक है और यह शरीर में अनेक प्रकार के काम भी करता है| लिवर शरीर में पित्त का उत्पादन करने और भोजन को पचाने का काम करता है| पित्त एक प्रकार का तरह पदार्थ होता है और यह पित्ताशय की थैली में विटामिन और प्रोटीन के अवशोषण के लिए बहुत जरुरी होता है यह शरीर में खून को छानने का काम भी करता है|

हम जब कुछ ऐसा आहार लेते है, जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है, तो लिवर उस आहार को निष्क्रिय कर देता है| इसके बाद यह प्रोटीन का निर्माण करता है, जो शरीर को संक्रमण से बचाता है| लिवर के मुख्य कार्य निम्न लिखित है|

रक्त डिटॉक्सिफिकैशन
रक्त का शुद्धिकरण
भोजन का पाचन
मलत्याग
एन्जाइम सक्रियण
पित्त उत्पादन

जिगर के रोग (Liver Disease)

*लीवर सिरोसिस* – यह लीवर में होने वाला एक विशेष प्रकार का रोग है और इस रोग का विकास लीवर में धीमी गति से होता है| लीवर सिरोसिस की प्रॉब्लम में लिवर धीरे धीरे सिकुड़ने लगता है और कठोर हो जाता है|

*स्वप्रतिरक्षित रोग* स्वप्रतिरक्षित रोग से शरीर के उत्तको, कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचता है| इन सभी बीमारियों का सीधा असर हमारे लीवर पर पड़ता है और हमारे लिवर की कार्य करने की शक्ति धीरे धीरे कम होती जाती है|

*फैटी लीवर* – जब लिवर में संक्रमण पैदा करने वाली वसा या फैट अधिक जमा हो जाता है, तब इसे फैटी लीवर कहते है|

*लीवर एबसेस*– लीवर एबसेस जिगर में फोड़ा होने की समस्या को कहते है|

*लीवर कैंसर* – लीवर की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होने के कारण लीवर में कैंसर हो जाता है|

*लीवर फेल्योर* – लीवर में किसी भी बीमारी के लम्बे समय तक चलने और दवा के माध्यम से भी ये बीमारी ठीक ना होने के कारण लीवर काम करना बंद कर देता है| लीवर के काम करना बंद करने की स्थति को लीवर फेल्योर कहते है|

*विषाणुज हेपेटाइटिस* विषाणुज हेपेटाइटिस में संक्रमण के कारण लिवर में सूजन आ जाती है| विषाणुज हेपेटाइटिस हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है|

*जिगर की कमजोरी की कारण* 

अधिक तैलीय और मशालेदार भोजन का सेवन
खराब और अधिक दवा का सेवन
लम्बे समय तक कब्ज की समस्या
फ़ास्ट फ़ूड और बाहर के भोजन का अधिक सेवन
अधिक मात्रा में शराब और धूम्रपान करना

*लिवर खराब होने के लक्षण* 
शरीर का रंग पीला पड़ना
पाचन तंत्र डैमेज होना
मतली की समस्या होना
पेट में सूजन आना
पेशाब के रंग में परिवर्तन
शारीरिक कमजोरी
आँखों के निचे काले घेरे
नींद में कमी
मुँह से बदबू आना
मानसिक प्रॉब्लम
स्थति खराब होने पर मरीज कोमा में जा सकता है|

*लिवर की सूजन कैसे कम करे*
1. लिवर में सूजन आने पर करेला, गाजर, टमाटर और पालक जैसी गुणकारी सब्जियों का सेवन अधिक करना चाहिए|

2. लिवर की सूजन में लीची, सेब, जामुन और पपीते का सेवन करे|

3. लिवर में सूजन और गर्मी की समस्या होने पर घी और तैलीय चीजों का सेवन ना करे|

4. लिवर की गर्मी दूर करने के लिए पानी अधिक मात्रा में पियें|

5. लिवर की गर्मी और सूजन को दूर करने के लिए लस्सी का सेवन करे|

6. लिवर से जुडी बीमारियों से बचने और लिवर की सूजन को दूर रखने के लिए कम मिर्च मशालेदार चीजों का सेवन करे|

7. लिवर में सूजन, गर्मी और कमजोरी आने पर मीठी चीजों का सेवन ना करे|

8. लिवर सूजन और गर्मी की समस्या होने पर भोजन के स्थान पर ताजे फलो और हरी सब्जियों का सेवन करे|

*लिवर की सूजन और गर्मी का इलाज*

1. लिवर की सभी प्रकार की सूजन और सभी प्रकार की बीमारियों को दूर करने के लिए रोजाना खाली पेट 300 ग्राम जामुन खाये| इसके बाद सूरज ढलने से पहले 200 ग्राम जामुन खाये| ध्यान रहे जामुन अच्छी क्वालिटी की होनी चाहिए| नियमित रूप से कुछ दिनों तक ऐसा करने से लिवर की सूजन और अन्य जुडी बीमारियां दूर हो जायेगी|

2. पीले रंग की बड़ी हरड़ को पीसकर बारीक़ चूर्ण बना ले| अब पुराने गुड में इस चूर्ण को मिलाकर छोटी छोटी गोलियां बना ले| अब सुबह शाम रोजन ताजे पानी से एक एक गोली ले| एक से डेढ़ महिले तक रोजाना ऐसा करने से लिवर की सूजन और अन्य बीमारियां दूर हो जायेगी|

3. पपीते के बीजो को सुखाये और इसका बारीक़ चूर्ण बना ले| अब एक बड़े चम्मच पपीते के बीज के चूर्ण में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर रोजाना दिन में दो बार कुछ दिनों तक नियमित रूप से ले| इस घरेलू नुस्खे के सेवन से लिवर की सूजन जल्दी ही दूर हो जायेगी|

4. एक गिलास पानी में 25 ग्राम आंवले का रस मिलाकर रोजाना दिन में चार बार सेवन करने से लिवर की सूजन दूर हो जाती है और इससे लिवर को मजबूती भी मिलती है|

5. लिवर से जुडी सभी बीमारियों को दूर करने के लिए और लिवर की कमजोरी दूर करने के लिए रोजाना दिन में तीन बार नियमित रूप से गेहूँ के ज्वारे (Wheatgrass) का सेवन करे| इसमें शरीर के लिए जरुरी सभी प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते है|

6. लिवर की सूजन, गर्मी और अनेक सम्बंधित बीमारियों को दूर करने के लिए रोजाना दिन में दो बार गाजर के जूस में पालक का जूस मिलाकर पियें|

7. एक गिलास ताजे पानी में स्वादनुसार शहद और एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर रोजाना दिन में दो बार पियें| इससे शरीर में मौजूद सभी विषैले पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते है| जिससे लिवर की कमजोरी दूर होती और लिवर सभी प्रकार के संक्रमण से बच जाता है|

8. लिवर की सूजन और कमजोरी को दूर करने के लिए रोजाना रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पियें| हल्दी वाला दूध सूजन कम करने का सबसे अच्छा और सस्ता उपाय है|

9. लिवर अच्छी तरह काम करे, इसके लिए लिवर को विटामिन डी उपयुक्त मात्रा में मिलना जरुरी होता है| आंवले में अधिक मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है| लिवर अच्छी तरह काम करे और लिवर से जुडी सभी प्रकार की बीमारियां दूर हो जाये, इसके लिए रोजाना तीन बार आंवले के जूस या आंवले के मुरब्बे का सेवन करे|

10. लिवर की गर्मी दूर करने के लिए एक गिलास ताजी लस्सी में पीसी काली मिर्च, पीसा जीरा और पीसी हींग मिलाकर भोजन करने के बाद रोजाना एक गिलास पियें| इस घरेलू नुस्खे के रोजाना सेवन से कुछ ही दिनों में लिवर की गर्मी दूर हो जायेगी|

11. लिवर की कमजोरी और गर्मी को दूर करने के लिए रोजाना सुबह शाम एक गिलास ताजे पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर पियें|

12. अगर आपको लीवर सिरोसिस की समस्या है अर्थात अगर आपका लिवर सिकुड़ने लगा है, तो रोजना दिन में दो बार 100 ग्राम कच्ची प्याज खाये| कुछ दिनों तक नियमित ऐसा करने से लीवर से जुडी सभी बीमारियां दूर हो जायेगी|

13. पानी को उबालने के लिए रखे और इस पानी में मुलेठी की जड़ का पाउडर डाले और कुछ देर बाद छलनी से छानकर इसे ठंडा करके पियें| नियमित रूप से कुछ दिनों तक इस घरेलू नुस्खे के सेवन से लिवर की गर्मी दूर हो जायेगी|

*लिवर स्वास्थ्य के टिप्स* 

1. रोजाना योग और व्यायाम करे

2. एंटीबायोटिक दवा का अधिक जरूरत पड़ने पर ही करे|

3. अधिक तैलीय और मशालेदार भोजन ना करे|

4. दवा का अधिक सेवन करने से बचे|

5. दवा हमेशा अच्छी कंपनी की खाये|

6. शराब और धूम्रपान से हमेशा दूर रहे|

7. बाहर का खाना और जंक फ़ूड ना खाये|

इस पोस्ट में हमने आपको लिवर की सूजन, लिवर की गर्मी और लिवर की कमजोरी दूर करने के घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों के बारे में बताया| ये नुस्खे लिवर से जुडी सभी बीमारियों के इलाज में कारगर है, और इनका शरीर पर किसी प्रकार का कोई गलत असर नही पड़ता है फिर भी किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेकर उपयोग करे

Saturday, 5 December 2020

कुछ दिन पी लीजिए इस तरह दूध को 80 साल तक कैल्शियम की कमी नहीं हो सकती


 

कुछ दिन पी लीजिए इस तरह दूध को 80 साल तक कैल्शियम की कमी नहीं हो सकती | यानी कि पूरी उम्र कैल्शियम की कमी कभी नहीं होगी | ताकत का खजाना है यह दूध | सही डाइट नहीं लेने के कारण लोग शारीरिक तौर पर कमजोर होने लगते हैं और शारीरिक कमजोरी होने के वजह से शरीर में धीरे-धीरे बहुत सारी बीमारियां होने लगती है |

आज हम बात करते हैं ऐसी चीज के बारे में जिसका इस्तेमाल करने से शरीर फौलादी और आकर्षित बन जाएगा | चेहरे पर हमेशा गलो रहेगा |अगर आप इसे रोजाना खाएंगे तो शरीर की अंदरूनी कमजोरी समय से पहले चेहरे पर रिंकल्स, बुढ़ापे का असर, हड्डियों का कमजोर होना | शरीर में कैल्शियम की कमी होना कमर में दर्द होना, जोड़ों में दर्द होना, बालों का सफेद होना या फिर झड़ना, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर |

इन सभी समस्याओं का हल करने के अलावा हमारे शरीर की और बहुत सारी तकलीफों को दूर करने में मदद करेगा | हमारी इम्यूनिटी को बूस्ट करेगा | दूध हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है यह तो हम सब जानते ही हैं | दूध में इतने पोषक तत्व होते हैं अगर इसे संपूर्ण आहार कहा जाए तो गलत नहीं है | फिर भी बहुत सारे लोग दूध नहीं पीते | बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यानी कि हर एक उम्र के इंसान को दूध जरूर पीना चाहिए | दूध में अच्छी मात्रा में विटामिन A, विटामिन B12 पाया जाता है | आपको पता ही होगा कि विटामिन B12 हमारे नर्वस सिस्टम यानी की नसों के लिए काफी फायदेमंद है | नसों को ताकत देने के लिए दूध बहुत जरूरी है | विटामिन B12 सिर्फ डायरी प्रोडक्ट यानी दूध व दूध से बनी चीजें इसके अलावा नॉनवेज भी मिलता है | इसकी कमी से शरीर में भयंकर बीमारियां हो जाती है |

इसके अलावा दूध में मौजूद कैल्शियम और विटामिन डी होता है | दूध से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है | जो कैंसर हड्डियों की कमजोरी गठिया माइग्रेन सिर दर्द जैसी बीमारियों को रोकता है | लेकिन अगर आप दूध में दो चीजें और मिक्स कर देंगे तो इसके फायदे भी दोगुने हो जाएंगे | तो वह दोनों चीजें कौन सी है मखाना, खसखस | इनकी खास बात यह है इनकी तासीर ठंडी होती है यानी कि गर्मियों के दिनों में आप इनका सेवन बड़ी आसानी से कर सकते हैं | तो चलिए जानते हैं आपने खसखस और मखाने का सेवन किस तरह करना है | कैसे पीना है | इसके क्या फायदे हैं |

खसखस, मखाने का दूध कैसे करें तैयार :-

  • आपने एक चम्मच खसखस लेनी है |
  • उसे 3 घंटों के लिए पानी में भिगो कर रख दीजिए |
  • 3 घंटों के बाद आप खसखस का एक पेस्ट तैयार कर लीजिए और एक गिलास दूध ले लीजिए |
  • उसके अंदर 8 से 10 मखानों को उबाल लीजिए |
  • बॉयल हुए मखानों वाला दूध आप इसे हल्का सा ठंडा यानी गुनगुना करके इसके अंदर खसखस वाला पेस्ट मिक्स कर दीजिए |
  • उसके बाद आप इसे रात के समय सोते समय इसका सेवन करना है |

खसखस, मखाने वाले दूध से शरीर स्वस्थ –

  • इस दूध में बहुत सारा ओमेगा-3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड होता है |
  • प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, होता है |
  • वही मखाने के अंदर प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट, पोटेशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम होता है |
  • एक खास बात और है कि इसके अंदर कोलेस्ट्रोल सोडियम कम होती है जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काफी मदद करती है |

खसखस, मखाने वाले दूध से मोटापा कम –

  • जो लोग बहुत मोटे हैं उनको इस दूध का सेवन रोजाना करना चाहिए |
  • क्योंकि यह हमारे मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर हमारे रेट को कम करता है |
  • लेकिन कुछ लोग यह सोचेंगे कि हम तो बहुत पतले हैं या फिर अंडरवेट हैं तो क्या हम इसका सेवन नहीं कर सकते |
  • नहीं आप इसका सेवन भी कर सकते हैं |
  • क्योंकि मखाने और खसखस वाला दूध पीने से हमारा मेटाबॉलिज्म तेज होता है |
  • यह हमारे शरीर के वजन को बैलेंस करता है |
  • जो भी लोग पतले हैं वह भी बड़े आराम से इसका सेवन कर सकते हैं |

खसखस, मखाने वाले दूध से शरीर का दर्द दूर –

  • मखाने और खसखस वाला दूध पीने का एक और बड़ा फायदा है |
  • जिनके भी मांसपेशियों में लगातार दर्द रहता है |
  • शरीर में लगातार दर्द रहता है |
  • जोड़ों में दर्द रहता है |
  • कमर दर्द रहता है |
  • घुटनों में बहुत दर्द रहता है |
  • तो आपको रोजाना 30 दिन यानी कि 1 महीना इसके दूध का सेवन करना है बिना छोड़े |

खसखस, मखाने वाले दूध से नसें मजबूत –

  • अगर आपकी नसे भी बहुत कमजोर हैं |
  • रात को सोते समय आपकी टांगों में दर्द होता है |
  • पैरों में दर्द होता है, टांगो की पिंडलियों में बहुत दर्द होता है |
  • तो एक महीना रेगुलर इसका सेवन करने से आपको बहुत फायदा होगा |
  • इसका असर आपको 5 से 7 दिनों में मिल जाएगा |

खसखस, मखाने वाले दूध से हड्डिया व् दाँत मजबूत –

  • खसखस दूध मखाना तीनों ही कैल्शियम और फास्फोरस का खजाना है |
  • तो हड्डियों और दांतो को मजबूत करने के लिए यह बहुत फायदेमंद है |
  • इसके अलावा जिन को सांस लेने में समस्या आती है |
  • सांस से संबंधित समस्या है जुखाम बहुत जल्दी हो जाता है या फिर साइनस की समस्या है तो आपको इस दूध का सेवन रोजाना करना चाहिए |

खसखस, मखाने वाले दूध से नींद ना आने की समस्या दूर –

  • आजकल की लाइफ स्टाइल के कारण लोगों को नींद बहुत कम आती है |
  • दिमाग पर टेंशन बनी रहती है तो इस दूध के अंदर एलके नाइन होता है जो कि अच्छी नींद लाने में सहायक है |
  • नींद को बढ़ावा देने के लिए नारकोटिक पाया जाता है |
  • इसलिए इसे पीने से अच्छी नींद आती है |
  • अगर आप रात के समय इस दूध को पी कर सोते हैं तो सुबह अपने आप को आप बहुत ही अच्छा महसूस करेंगे |
  • अगर आप रात को नींद की गोली लेकर सोते हैं तो अगर आप इस दूध का सेवन करते हैं तब आपको गोली यानी दवाई लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी |

खसखस, मखाने वाले दूध से कब्ज की समस्या दूर –

  • इसमें बहुत अच्छी मात्रा में फाइबर होता है जिनको भी कब्ज की समस्या है उन्हें खसखस मखाने वाला दूध रोजाना रात को पीकर सोना चाहिए |

खसखस, मखाने वाले दूध से ब्लड प्रेशर की समस्या दूर –

  • अगर किसी को ब्लड प्रेशर की समस्या है तो उनके लिए भी यह दूध का सेवन करना बहुत फायदेमंद है |
  • चाहे ब्लड प्रेशर लो ब्लड प्रेशर हो या फिर हाई ब्लड प्रेशर हो दोनों ही ब्लड प्रेशर में बहुत फायदेमंद है |

खसखस, मखाने वाले दूध से खून की कमी पूरी –

  • खसखस और मखाने वाला दूध पीने से हमारे शरीर में खून की कमी पूरी होती है |

खसखस, मखाने वाले दूध से दिमाग की समस्या दूर –

  • अगर आप मेमोरी कमजोर वाली समस्या का सामना कर रहे हैं तो खसखस और मखाने वाला दूध पीना बहुत फायदेमंद है |
  • क्योंकि इस दूध के अंदर विटामिन B12 और कॉपर होता है जो हमारे दिमाग को एक्टिव करता है |दिमाग को तेज करता है |

खसखस, मखाने वाले दूध से किडनी में स्टोन की समस्या दूर –

  • जिनकी किडनी में स्टोन भी बार-बार बनता है यानी पथरी की समस्या है तो उनको भी इस दूध का सेवन रोजाना करना चाहिए |

खसखस, मखाने वाले दूध से डायबिटीज की समस्या दूर –

  • इसके अलावा जो भी डायबिटीज मरीज हैं उनके लिए यह दूध का सेवन करना बहुत फायदेमंद है |

खसखस, मखाने वाले दूध से थायराइड की समस्या दूर –

  • अगर आप थायराइड की बीमारी को फेस कर रहे हैं |
  • यानी कि थायरोक्सिन हार्मोन ज्यादा कम प्रोड्यूज होता है तो भी मखाने और खसखस वाला दूध रोजाना पीना चाहिए |

खसखस, मखाने वाले दूध से चेहरे की समस्या दूर –

  • खसखस और खाने वाले दूध में एंटी एजिंग भरपूर होते हैं |
  • जिनके फेस पर बहुत ज्यादा रिंकल्स आते हैं आप अपनी उम्र से बड़े दिखते हैं तो उनको भी इसका सेवन रोजाना करना चाहिए |
  • हमारी हमारी स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाता है यह दूध मखाने में दूरियां और एजिंग के अन्य लक्षणों को खत्म करने में काफी मदद करता है |
  • अगर आप हमेशा ही यंग देखना चाहते हैं तो इस दूध को आप रोजाना पीजिये |
  • अगर आप रोजाना नहीं पी सकते तो आप एक दिन छोड़कर 1 दिन इसका सेवन कीजिए |
  • यह दूध आपको अंदर से स्ट्रांग बाहर से खूबसूरत बनाएगा |

खसखस, मखाने वाले दूध से पुरुषो की अंदुरुनी कमजोरी दूर –

  • इसके अलावा यह दूध पुरुषों के लिए काफी फायदेमंद है जो पुरुषों की अंदरूनी कमजोरी को दूर करता है और उनको ताकत देता है |

खसखस, मखाने वाले दूध से साँस फूलने की समस्या दूर –

  • जो लोग अंदर से कमजोरी महसूस करते हैं, थोड़ा सा काम करने पर काफी थक जाते हैं, दौड़ने पर हाफने लगते हैं, सांस फूलने लगती है |
  • उनके लिए भी दूध का सेवन करना काफी फायदेमंद है |
  • एक महीना रोजाना इसका सेवन जरूर करें बस एक चीज का ध्यान जरूर करें |
  • आपको इसका सेवन रात के समय करना है |

क्या करें क्या ना करें 

  • आपको सेवन करने के बाद कम से कम 15 मिनट सैर जरूर करनी है |
  • ऐसे नहीं करना कि आपने दूध का सेवन किया और तुरंत सो गए |
  • इसके अलावा आप दिन में कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जरूर कीजिए ताकि यह मखाने वाला दूध अच्छे से डाइजेस्ट हो सके |
  • इस पोस्ट में हम आपको कुछ और चीजें हैं जो गर्मियों में ध्यान में रखनी है |
  • आपने फ्रिज वाला पानी नहीं पीना |
  • इसके अलावा अगर आप ठंडा पानी पीना चाहते हैं तो आप मटके वाला पानी पीजिए |
  • अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा शामिल कीजिए |

मखाना के फायदे, उपयोग और नुकसान

 सूखे मेवे में शामिल होने वाले मखाना को भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में इस्तेमाल में किया जाता है। बहुत से लोग इसे भून कर खाना पसंद करते हैं। वहीं, कई लोग इसे फ्राई कर इस्तेमाल में लाते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो इसकी खीर बनाकर इसका सेवन करते हैं। इन तीनों ही तरीकों से, इसके भिन्न-भिन्न स्वाद का लुत्फ उठाया जा सकता है। वहीं, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि स्वाद के साथ ही यह सेहत के लिए भी अत्यधिक लाभकारी है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको मखाना के फायदे और उपयोग के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात की जानकारी भी विस्तार से देंगे कि मखाना खाने से क्या होता है।

मखाना क्या है?

मखाना, कमल के बीज को कहते हैं। यह एक स्वादिष्ट और पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसे कई नामों से जाना जाता है, जैसे फॉक्स नट, फूल-मखाना, लोटस सीड और गोर्गन नट । वहीं, इसके बीजों को भूनने के बाद इसका उपयोग कई प्रकार की खाद्य सामग्री में किया जाता है। इसके अलावा, यह कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। नीचे स्वास्थ्य के लिए मखाना के फायदों को विस्तार से बताया गया।

मखाना में  औषधीय गुण 

मखाना में कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मखाने में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी ट्यूमर प्रभाव पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसका सेवन बुखार, पाचन तंत्र सुधारने में और दस्त के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा, यह कई खास एल्कलॉइड से भी समृद्ध होता है। ये सभी गुण और प्रभाव मखाने को स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बनाने का काम करते हैं

मखाने के फायदे – 

नीचे हम शरीर के लिए मखाने के फायदे बता रहे हैं। जानिए मखाने का सेवन किस प्रकार स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का काम कर सकता है। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि मखाना लेख में शामिल किसी भी बीमारी का डॉक्टरी इलाज नहीं है। इसका सेवन केवल शारीरिक समस्या से बचाव और शरीर को स्वस्थ रखने का एक तरीका हो सकता है।

1. वजन कम करने के लिए मखाने के लाभ

वजन घटाने में मखाने के फायदे की बात करें, तो इसका उपयोग मोटापे की समस्या से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, कमल के बीज (मखाना) का एथेनॉल अर्क शरीर में फैट सेल्स को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह फैट सेल्स के वजन को भी कम कर सकता है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि इसका उपयोग वजन को कम करने में सहायक साबित हो सकता है

2. ब्लड प्रेशर में लाभदायक मखाना के गुण

बात करें, ब्लड प्रेशर में मखाने के फायदे की, तो माना जाता है कि मखाने के नियमित इस्तेमाल से इस गंभीर समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। कारण यह है कि इसमें पाया जाने वाला एल्कलॉइड हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को नियंत्रित करने का काम कर सकता है। इसलिए, बीपी की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मखाने का सेवन किया जा सकता है ।

3. डायबिटीज में मखाने के फायदे

डायबिटीज की समस्या से राहत पाने के लिए भी मखाने का उपयोग किया जा सकता है। एक शोध के आधार पर इस बात की पुष्टि की गई है कि मखाने में पाए जाने वाले रेसिस्टेंट स्टार्च में हाइपोग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर को कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। यह प्रभाव मधुमेह की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकता है। इसके अलावा, यह इंसुलिन को भी नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है 

4. हृदय के लिए मखाना का गुण

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि मखाने का सेवन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने का काम कर सकता है । इसके अलावा, यह मधुमेह और बढ़ते वजन को भी नियंत्रित कर सकता है । वहीं, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को हृदय रोग का जोखिम कारक माना जाता है । इस आधार पर कहा जा सकता है कि मखाने का सेवन इन समस्याओं से बचाव कर इनसे होने वाले हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि कमल का बीज यानी मखाना कार्डियोवस्कुलर रोग (हृदय संबंधी) से बचाव का काम कर सकता है ।

5. प्रोटीन का अच्छा स्रोत

मखाने में प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। 100 ग्राम मखाने में लगभग 10.71 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है । इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि मखाना खाने के फायदों में प्रोटीन की कमी को पूरा करना भी शामिल है। इसके नियमित उपयोग से शरीर में प्रोटीन की आवश्यक मात्रा की पूर्ति के साथ, उसकी कमी से होने वाली कई समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है।

6. गर्भावस्था में मखाना खाने के फायदे

गर्भावस्था में मखाना का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। गर्भावस्था में महिलाओं के लिए मखाने का उपयोग कई प्रकार के पकवानों में मिलाकर किया जाता है। एक शोध के अनुसार, मखाने का उपयोग गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद की होने वाली कमजोरियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व जैसे की आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पाेटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं ।

7. अनिद्रा में मखाने के लाभ

अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या में मखाना के लाभ देखे जा सकते हैं। इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि अनिद्रा की समस्या के लिए मखाने का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता है । हालांकि, इस लाभ के पीछे मखाने का कौन-सा गुण जिम्मेदार होता है, फिलहाल इससे जुड़ा सटीक वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।  

8. मसूड़ों के लिए मखाना खाने के फायदे

शोध में पाया गया है कि मखाने में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव पाए जाते हैं । मखाने में पाए जाने वाले ये दोनों गुण मसूड़े संबंधित सूजन और बैक्टीरियल प्रभाव के कारण होने वाली दांतों की सड़न को रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं। इस कारण माना जा सकता है कि मखाने में पाए जाने वाले ये गुण मसूड़ों की सूजन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर सीधे तौर पर कोई शोध उपलब्ध नहीं है।

9. किडनी के लिए बेनिफिट्स ऑफ मखाना

मखाने का उपयोग किडनी के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई के एक शोध में जिक्र मिलता है कि मखाने का सेवन अन्य समस्याओं जैसे दस्त के साथ किडनी से जुड़ी परेशानियों से बचाव का काम कर सकता है । फिलहाल, यहां यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन-सा गुण किडनी की समस्या को ठीक करने में लाभदायक हो सकता है।

10. एंटी-एजिंग बेनिफिट्स ऑफ मखाना

त्वचा से संबंधित समस्याओं में मखाने के उपयोग पर किए गए एक शोध में पता चला है कि मखाना एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। यह गुण त्वचा पर आने वाले एजिंग के प्रभाव जैसे झुर्रियों को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है

मखाने के पौष्टिक तत्व –  

मखाना खाने के फायदे उसमें मौजूद पौष्टिक तत्वों के कारण ही देखते को मिलते हैं। जानते हैं कि मखाने में कौन-कौन से पोष्टिक तत्व मौजूद होते हैं।

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
कैलोरी393 kcal
प्रोटीन10.71 ग्राम
फैट10.71 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट71.43 ग्राम
फाइबर3.6 ग्राम
शुगर3.57 ग्राम
कैल्शियम18 मिलीग्राम
पोटेशियम57 मिलीग्राम
सोडियम750 मिलीग्राम
फैटी एसिड टोटल सैचुरेटेड1.79 ग्राम

मखाना का उपयोग 

मखाने खाने के लाभ के बाद इसके उपयोग की बात की जाए, तो इसे कई तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें हम कुछ बिंदुओं की सहायता से जानेंगे।

  • मखाने को फ्राई कर स्नैक्स के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कई लोग मखाने की खीर बनाकर इसे खाने में इस्तेमाल करते हैं।
  • कुछ लोग ऐसे भी है, जो सब्जी बनाते वक्त इसे मटर और पनीर के साथ शामिल करते हैं।

समय  इसे नाश्ते के रूप में सुबह या शाम को खाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

मात्रा– मात्रा की बात की जाए, तो सामान्य तौर पर एक बार में 20 से 30 ग्राम मखाने का उपयोग किसी भी रूप में किया जा सकता है। फिलहाल, इस संबंध में कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है।

Tuesday, 10 November 2020

एक टेस्ट - अर्थराइटिस के मरीजों के लिए फायदेमंद है व अर्थराइटिस ( गठिया) के कारण व घरेलू उपचार

 




जब आपका इम्यून सिस्टम आपके जोड़ों पर हमला करता है तो आपको रूमेटाइड अर्थराइटिस की समस्या का सामना करना पड़ता है

सी रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट क्या है?

सी रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) टेस्ट एक ब्लड टेस्ट है, जो शरीर में सी रिएक्टिव प्रोटीन प्रोटीन की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है। सीआरपी एक प्रोटीन है जिसे लिवर बनाता है। सीआरपी के जरिए शरीर में सूजन का भी पता लगाया जाता है। आमतौर पर हमारे रक्त में सी रिएक्टिव प्रोटीन की मात्रा कम होती है। 

सीआरपी का हाई लेवल कई गंभीर बीमारियों की तरफ इशारा करता है, लेकिन इससे शरीर में कहां और किस कारण सूजन है, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है। शरीर में सूजन के कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर अन्य परीक्षण यानि टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट क्यों किया जाता है?

सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट शरीर में सूजन का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट से शरीर में सूजन है या नहीं, इसका पता लगाया जाता है। हालांकि, यह टेस्ट शरीर में सूजन के कारणों की जानकारी नहीं देता है। अगर इस टेस्ट से शरीर में सूजन होने के बारे में पता चलता है, तो डॉक्टर आपको नीचे बताए गए टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं :

  1. अर्थराइटिस (Arthritis)
  2. ल्यूपस (Lupus)
  3. वाहिकाशोध

डेली रूटीन का सबसे ज्यादा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में हमे कई बीमारियों का शिकार होना पड़ता है। उन्हीं में से एक है अर्थराइटिस। ये एक ऐसी बीमारी है जो शरीर को काफी तकलीफ देने का काम करती है। पहले अर्थराइटिस को बड़ी उम्र की बीमारी माना जाता था। लेकिन आजकल युवाओं में भी इस बीमारी के काफी लक्षण देखे जा रहे हैं। वैसे तो इसके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन लोगों में शारीरिक मेहनत और व्यायाम में कमी और साथ ही खान-पान की गड़बड़ी और अनियमित जीवनशैली है इसका बड़ा कारण है।

रूमेटाइड अर्थराइटिस, अर्थराइटिस का ही एक प्रकार है जो किसी भी उम्र के शख्स में हो सकता है। ये महिलाओं में काफी आम है और अक्सर मध्यम आयु में होता है। अर्थराइटिस के दूसरे प्रकार की तरह ही इसमें भी जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या होती है। जब आपका इम्यून सिस्टम आपके जोड़ों पर हमला करता है तो आपको रूमेटाइड अर्थराइटिस की समस्या का सामना करना पड़ता है।

रूमेटाइड अर्थराइटिस 

अगर आप भी रूमेटाइड अर्थराइटिस का शिकार है तो आपके जोड़ों में दर्द होता रहेगा। आपको बता दें कि इसका कारण ये है कि जोड़ों में सूजन रहती है। सूजन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो तब होती है जब आपका इम्यून सिस्टम बाहरी आक्रमणकारी (फॉरेन इनवेडर) पर हमला करता है।

सी-रिऐक्टिव प्रोटीन

सी-रिऐक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) एक प्रोटीन होता है। जिसका आपका लीवर बनाता है। ये प्रोटीन आपके खून में पाया जाता है। सूजन के समय आपके खून में सीआरपी का स्तर बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, जब आपको कोई इन्फेक्शन होता है तो आपके खून में सीआरपी स्तर बढ़ जाता है। जब इन्फेक्शन पर नियंत्रित हो जाता है तो उच्च सीआरपी स्तर गिर जाता है।

सीआरपी और रूमेटाइड अर्थराइटिस की पहचान

  • लैब टेस्ट, जैसे कि रूमेटाइड कारक की पहचान के लिए ब्लड स्कैनिंग। 
  • आपके जोड़ों की सूजन और दर्द।
  • लक्षणों की अवधि। 
  • सीआरपी टेस्ट(CRP TEST)

    सीआरपी टेस्ट के लिए आपको खून का सैंपल देना पड़ता है। इसके बाद उसे लैब में ले जाया जाएगा और फिर जब रिपोर्ट आने पर आपको उसे डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा। इसके बाद आपका डॉक्टर आपको बताएगा कि आपको किस तरह की दवाइयों की जरुरत है। सीआरपी टेस्ट के लिए खून देने में किसी प्रकार का जोखिम नहीं होता।

    सीआरपी(CRP) स्तर को बढ़ाना

    अगर रूमेटाइड अर्थराइटिस के लिए आपका टेस्ट किया जा रहा है तो आपका डॉक्टर आपको स्टैंडर्ड सीआरपी टेस्ट करवाने के लिए कहेगा, बजाय कि हाई-सेंसीटीविटी टेस्ट के। स्टैंडर्ट टेस्ट के साथ सीआरपी के उच्च स्तर का पता लगाया जा सकता है। सीआरपी का बढ़ा हुआ स्तर किसी सूजन की बीमारी का संकेत हो सकता है, लेकिन यह रूमेटाइड अर्थराइटिस की निश्चित पहचान कर पाने में सक्षम नहीं है।
  • इलाज

    रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज आपको बहुत ही ध्यान से कराना होता है। आपको समय के साथ इलाज कराना बहुत जरूरी हो जाता है। डॉक्टर आपको समय-समय पर सीआरपी टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है। आपका सीआरपी स्तर इस बात का संकेत दे सकता है कि आपका ट्रीटमेंट कैसा चल रहा है। 
    अगर आपका ऐसे में आपका सीआरपी स्तर गिर गया है तो इसका मतलब है दवाई अपना असर दिखा रही है। इसके अलावा अगर आपका सीआरपी स्तर बढ़ गया है तो डॉक्टर समझ जाएगा कि आपको नए इलाज की जरुरत है।
  • अर्थराइटिस ( गठिया)
  • गठिया का सबसे ज्यादा असर घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर होता है। इसके साथ ही अंगुलियों के जोड़ों, कलाई, कूल्हों और पैरों के जोड़ों को भी प्रभावित करता है। भारत में हर दूसरा या तीसरा मरीज घुटने की परेशानी से जूझ रहा है।लोगों की बढ़ती उम्र के साथ अक्सर देखा जा रहा कि गठिया रोग (आर्थराइटिस) उन्हें अपनी गिरफ्त में ले रहा है। 


    कच्चे आलू से फायदा

    आलू रसोईघर बड़ा महत्व रखता है, क्योंकि आलू से हम कई तरह कि डिश तैयार करते हैं। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि गठिया के रोग में आलू रामबाण साबित होता है। आपको बता दें कि कच्चे आलू का रस गठिया के इलाज में बहुत फायदेमंद होता है। कच्चे आलू के रस में एन्टी इंफ्लैमटोरी गुण होने के चलते यह गर्दन, कोहनी, कंधा और घुटनों के दर्द में बहुत राहत पहुंचात है। कच्चे आलू के रस को पीने से उन लोगों को भी फायदा मिलता है जो लोग लंबे समय से आर्थराइटिस के दर्द से परेशान हैं। कच्चे आलू के रस को निकालने के लिए उसे बिना छीले ही पतले टुकड़ों में काट लें। इसके बाद आलू के टुकड़ों को पानी में रात भर के लिए ढककर रख दें। सुबह खाली पेट इस पानी को पीएं। इससे जरूर लाभ मिलेगा। कच्चे आलू के रस से गठिया रोग का इलाज सदियों से किया जा रहा है।

    इनका सेवन भी फायदेमंद
    1- सब्जियों का जूस
    2- तिल के बीज
    3- लहसुन
    4- केला
    5- मूंग की दाल का सूप
  • गठिया रोग में सेम और अन्य फलीदार सब्जियों (बींस), चेरी, मशरूम, ओट्स, चौलाई, संतरा, भूरे चावल, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेथी, सोंठ, नाशपाती, गेहूं का अंकुर, सूरजमुखी के बीज, कद्दू, अंडा, (सोया मिल्क, सोया बडी, सोया पनीर, टोफू आदि) पपीता, ब्रोकली, लाल शिमला मिर्च, अजवायन, अनानास, अनार, आडू, अंगूर, आम, एलोवेरा, आंवला, सेब, केला, तरबूज, लहसुन, आलूबुखारा, सूखे आलूबुखारे, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी डेयरी पदार्थ जैसे दूध और दूध से बने उत्पाद (दही, पनीर आदि) कैल्शियम का अच्छा स्रोत है इन्हें आप ले सकते है लेकिन बेहतर यह होगा की आप गठिया रोग में दूध-दही भी कम मात्रा में ही लें. कैल्शियम की पूर्ति फलों और सब्जियों से करें गठिया रोग में फलो और सब्जियों में सहिजन, बथुआ, मेथी, सरसों का साग, ककड़ी, लौकी, तुरई, पत्ता गोभी, परवल, गाजर, अजमोद,आलू, शकरकंद, अदरक, करेला, लहसुन का सेवन करें. गठिया के रोगी को चौलाई की सब्जी भी फायदा करती है.गठिया रोग में अधिक पानी युक्त फल जैसे खरबूजा, तरबूज, पपीता, खीरा अधिक खाएं. गठिया रोग में हींग, शहद, अश्वगंधा और हल्दी भी लाभकारी हो सकते हैं

  • गठिया की चपेट में भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के लोग हैं। जैसे-जैसे यह रोग बढ़ता है, वैसे-वैसे रोगी के लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। गठिया का सबसे ज्यादा असर घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर होता है। इसके साथ ही अंगुलियों के जोड़ों, कलाई, कूल्हों और पैरों के जोड़ों को भी प्रभावित करता है। भारत में हर दूसरा या तीसरा मरीज घुटने की परेशानी से जूझ रहा है। जानकारों का मानना है कि देश में 15 करोड़ से अधिक लोग घुटने की बीमारी से पीड़ित हैं। जिस तेजी से यह बीमारी बढ़ रही है, आने वाले कुछ सालों में आर्थराइटिस लोगों को शारीरिक रूप से अक्षम बनाने में चौथा प्रमुख कारण होगा। भारतीय लोग आनुवांशिक तौर पर घुटने की आर्थराइटिस से अधिक ग्रस्त होते हैं। बताते चलें कि चीन में करीब 6.5 करोड़ लोग घुटने की समस्याओं से पीड़ित हैं, जो भारत में घुटने की समस्याओं से पीड़ित लोगों की संख्या से आधे से भी कम है।

  • क्यों होता है गठिया
    जब हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। इसके बाद रोगी के एक या एक से अधिक जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन आ जाती है। गठिया के अधिक बढ़ जाने पर रोगी को चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगती है। इसके अलावा जोड़ों में गांठे पड़ जाती हैं, जो रोगी को बहुत दर्द पहुंचाती हैं। जोड़ों में गांठ होने के कारण इसे गठिया कहते हैं। यूरिक एसिड कई तरह के खाद्य पदार्थों को खाने से बनता है

गिलोय के फायदे - जो जीवन मे भर दे अमृत

गिलोय के फायदे :-
1- डायबिटीज:-विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय हाइपोग्लाईसेमिक एजेंट की तरह काम करती है और टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित रखने में असरदार भूमिका निभाती है। गिलोय जूस (giloy juice) ब्लड शुगर के बढे स्तर को कम करती है, इन्सुलिन का स्राव बढ़ाती है और इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है। इस तरह यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत उपयोगी औषधि है।  

2- डेंगू:-डेंगू से बचने के घरेलू उपाय के रुप में गिलोय का सेवन करना सबसे ज्यादा प्रचलित है। डेंगू के दौरान मरीज को तेज बुखार होने लगते हैं। गिलोय में मौजूद एंटीपायरेटिक गुण बुखार को जल्दी ठीक करते हैं साथ ही यह इम्युनिटी बूस्टर की तरह काम करती है जिससे डेंगू से जल्दी आराम मिलता है।

3- अपच:-अगर आप पाचन संबंधी समस्याओं जैसे कि कब्ज़, एसिडिटी या अपच से परेशान रहते हैं तो गिलोय आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। गिलोय का काढ़ा, पेट की कई बीमारियों को दूर रखता है। इसलिए कब्ज़ और अपच से छुटकारा पाने के लिए गिलोय का रोजाना सेवन करें।

4- खांसी;-अगर कई दिनों से आपकी खांसी ठीक नहीं हो रही है तो गिलोय  का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। गिलोय में एंटीएलर्जिक गुण होने के कारण यह खांसी से जल्दी आराम दिलाती है। खांसी दूर करने के लिए गिलोय के काढ़े का सेवन करें।

5- बुखार:-गिलोय या गुडूची (Guduchi) में ऐसे एंटीपायरेटिक गुण होते हैं जो पुराने से पुराने बुखार को भी ठीक कर देती है। इसी वजह से मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर रोगों में होने वाले बुखार से आराम दिलाने के लिए गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है।

6– इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक :-बीमारियों को दूर करने के अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना भी गिलोय के फायदे  में शामिल है। गिलोय सत्व या गिलोय जूस (Giloy juice) का नियमित सेवन शरीर की इम्युनिटी पॉवर को बढ़ता है जिससे सर्दी-जुकाम समेत कई तरह की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है।

7- पीलिया:-पीलिया के मरीजों को गिलोय के ताजे पत्तों का रस पिलाने से पीलिया जल्दी ठीक होता है। इसके अलावा गिलोय के सेवन से पीलिया में होने वाले बुखार और दर्द से भी आराम मिलता है। गिलोय स्वरस (Giloy juice) के अलावा आप पीलिया से निजात पाने के लिए गिलोय सत्व का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।