Sunday, 9 June 2019

किडनी डायलीसीस क्यों ????

किडनी डायलीसिस क्यों......?

किडनी स्वस्थ अवस्था में  इर्यथ्रोपोइटिन नाम का हार्मोन बनाती हैं। यह हार्मोन शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह का कार्य करने वाले लाल रक्त कणों की संख्या में इजाफा करता है। किडनी में लाखों मिनी फिल्टर होते हैं जिन्हें नेफरोंस कहते हैं जो पूरी जिंदगी खून साफ करने का काम करते हैं। किडनी में होने वाले इस सफाई सिस्टम के कारण हमारे शरीर से हानिकारक केमिकल्स पेशाब के साथ बह जाते हैं।
किडनी के अन्य कामों में लाल रक्त कण का बनना और फायदेमंद हार्मोंस रिलीज करना शामिल हैं। किडनियों द्वारा रिलीज किए गए हार्मोंस के द्वारा ब्लड प्रेशर नियंत्रित किया जाता है और हड्डियों के लिए बेहद जरूरी विटामिन डी का निर्माण किया जाता है।
किडनी इसके अलावा शरीर में पानी और अन्य जरूरी तत्व जैसे मिनरल्स, सोडियम, पोटेसियम और फॉस्फोरस का रक्त में संतुलन बनाए रखती हैं।
उम्र बढ़ने पर किडनी की कार्यशीलता भी प्रभावित होती है परंतु कुछ ऐसे कारण होते हैं जिनसे समय के पहले ही किडनी से जुडी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ये समस्याएं कुछ कारणों से हो सकती हैं जिनमें किडनी की बीमारियों से जुड़ा पारिवारिक इतिहास,डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, नशा और अधिक वजन शामिल हैं।

युरिनरी फंक्शन में बदलाव :

सबसे पहला लक्षण जो उभर कर आता है वह है युरिनरी फंक्शन में बदलाव।  किडनी में उत्पन्न समस्या के चलते युरीन (पेशाब) के रंग, मात्रा और कितने बार पेशाब आती है में बदलाव आ जाएगा। इसके अलावा आप इन लक्षणों पर ध्यान दे सकते हैं।
*  रात में बार बार पेशाब आना।
* पेशाब की इच्छा होना परंतु बाथरूम में जाने पर पेशाब न होना।
* हमेशा से ज्यादा गहरे रंग में पेशाब आना।
* झाग वाली और बुलबुलों वाली पेशाब आना।
* पेशाब में खून दिखना।
*पेशाब करने में दर्द होना या जलन होना।
*पीठ दर्द का कारण न समझ पाना:
आपकी पीठ और पेट के किनारों में बिना वजह दर्द महसूस करना किडनी में इंफेक्शन या किडनी संबंधी बिमारियों के लक्षण हो सकते हैं।
इसके अलावा शरीर अकड़ना और जोड़ों में समस्या सामने आती है।
पीठ में नीचे की तरफ होने वाले दर्द की एक वजह किडनी में पथरी भी हो सकती है।
पोलिसासिस्टिक रेनाल डिजिज एक वंशानुगत बीमारी है जिससे किडनी के सिस्ट में पानी भर जाता है
शरीर में सूजन आना:
सूजन हाथों, पैरों, जोड़ों, चेहरे और आंखों के नीचे हो सकती है। अगर आप अपनी त्वचा को उंगली से दबाएं और डिम्पल थोड़ी देर तक बने रहें तो डॉक्टर के पास जाने में देर न करें।
चक्कर आना और कमजोरी :
किडनी के कार्य सही न होने से ब्लड प्यूरीफाई होने में मुश्किल होती है, जिससे गंदगी शरीर मे ही रुकने लगती है। शरीर में एनीमिया की स्थिति बनने से सर घुमना, हल्का सरदर्द, बैलेंस न बनना जैसे लक्षण उभरते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एनीमिया की वजह से दिमाग तक जरूरी मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता।
साँस फूलना और सांस लेने में परेशानी उत्पन्न होना।
स्किन खुरदुरी हो जाना और खुजली होना :
  अचानक से त्वचा फटना, रेशेज होना, अजीब लगना और बहुत ज्यादा खुजली महसूस होना शरीर की गंदगी के एकत्रित होने के परिणाम हो सकते हैं। शरीर में कैल्सियम और फॉस्फोरस की मात्रा प्रभावित हो जाती है जिससे अचानक से बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है
उल्टियां आना :
किडनी से जुड़ी समस्याओं के परिणामस्वरूप उल्टी आना।

गीली सी ठंड लगना : अच्छे मौसम के बावजूद अजीब सी ठंड लगना और कभी-कभी ठंड लगकर बुखार भी आ जाना।

अच्छे स्वास्थ्य की पहचान है कि शरीर के सभी अवयव सही और सुचारू रूप से काम करें। उन अवयवों में किडनी का सही काम करना बहुत जरूरी है। उपर्युक्त किसी भी तरह के लक्षणों को अनदेखा न करें। वरना आप डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट तक कि समस्या तक पहुँच सकते है।

Thursday, 6 June 2019

स्वास्थ्य : क्या आप जानते आखिर सेहत का अर्थ क्‍या है ?

आमतौर पर स्वास्थ्य का मतलब समझा जाता है रोग-रहित जीवन। लेकिन क्या सचमुच यही स्वास्थ्य है? तो फिर स्वस्थ रहने का मतलब क्या है? 
और कैसे रहें स्वस्थ्य ? 
‘स्वास्थ्य’ का अंग्रेजी पर्याय ‘हेल्थ’ मूलतः ‘होल’ शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है ‘संपूर्ण’। यानी जब हम कहते है, ‘स्वस्थ महसूस कर रहा हूं’, मतलब, अपने भीतर हमें एक पूर्णता का अहसास होता है। चिकित्सकीय दृष्टि से यदि हम बीमारियों से मुक्त हैं तो हमें स्वस्थ माना जाता है। लेकिन यही स्वास्थ्य नहीं है। अगर हम देह, मन और आत्मा से एक पूर्ण मनुष्य जैसा महसूस करते हैं, तभी हम वास्तव में स्वस्थ हैं। ऐसे अनेक लोग हैं जो चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ हैं, पर वे सच्चे अर्थ में स्वस्थ नहीं हैं, क्योंकि वे अपने भीतर तंदुरुस्ती का एहसास नहीं कर रहे होते।
यदि कोई संपूर्णता और एकत्व का अनुभव करना चाहता है, तो ज़रूरी है कि उसका शरीर,
मन और मुख्य रूप से उसकी ऊर्जा एक खास स्तर की तीव्रता में उसके भीतर काम करें। अब चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कोई शारीरिक रूप से स्वस्थ हो सकता है, पर उसकी ऊर्जा शिथिल हो सकती है। किसी व्यक्ति को यह पता नहीं चलता कि क्यों भीतरी और बाहरी जीवन में चीजें वैसी नहीं हो रही जैसा उन्हें होना चाहिय? क्योंकि वह अपनी ऊर्जा की कुशलता की परवाह नहीं करता।

शरीर और मन की हर स्थिति ऊर्जा पर आधारित होती है

जीवन में आप जिन भौतिक और मनोवैज्ञानिक स्थितियों से गुजरते हैं, उनका एक आधार ऊर्जा होता है। उनका एक रासायनिक आधार भी होता है। आधुनिक एलौपेथिक दवाइयाँ एक प्रकार से सिर्फ रसायन ही हैं। आपके शरीर में कोई समस्या पैदा हुई और आपने कोई दवा ले ली। यानी आप एक रसायन लेकर अपने अंदर एक संतुलन बनाते हैं। अगर आप एक असर को कम करने के लिये या दूसरे असर को ब़ढाने के लिये किसी रसायन का उपयोग करते हैं, तो उसका एक दुष्प्रभाव भी होता है जिसे आमतौर पर आप उसका ‘साइड इफेक्ट’ कहते हैं। फिर इस साइड इफेक्ट के लिये एक तोड़ होता है, फिर उस तोड़ के लिये एक दूसरा तोड़ होता है। यानी यह एक अंतहीन श्रृंखला है।
आपके शरीर में जो भी रासायनिक स्तर पर हो रहा है, उसे केवल अपनी ऊर्जा द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए अपनी ऊर्जा को एक खास तरह से सक्रिय करना होगा। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में अम्ल की अधिकता हो जाए तो आप उसे क्षार-युक्त दवा देते हैं। लेकिन अम्ल की अधिकता होती क्यों है? उसके मन, उसके शरीर और मुख्य रूप से उसकी ऊर्जा के कार्य करने के ढंग के कारण।

योग में सिर्फ ऊर्जा को ठीक किया जाता है

 योग में जब हम स्वास्थ्य कहते हैं, हम शरीर को नहीं देखते, हम मन को नहीं देखते, हम सिर्फ ऊर्जा के ढंग को देखते हैं। अगर आपका ऊर्जा-शरीर सही संतुलन और पूर्ण प्रवाह में है, तो आपका स्थूल शरीर और मानसिक शरीर पूर्ण स्वस्थ होंगे, इसमें कोई शक नहीं है। ऊर्जा-शरीर को पूर्ण प्रवाह में रखने का मतलब किसी तरह की हीलिंग या वैसी किसी चीज से नहीं है। यह तो अपने मौलिक ऊर्जा-तंत्र में जाकर उसे उचित ढंग से सक्रिय करना है। मौलिक योग-साधना के अभ्यास के द्वारा अपनी ऊर्जा को इस तरह स्थापित करना है कि शरीर और मन स्वाभाविक रूप से कुशल रहें।
जब स्वास्थ्य की बात आती है, तो कोई भी इंसान पूर्णतः बेदाग स्थितियों में नहीं पलता। हम जो भोजन करते हैं, हम जिस हवा में सांस लेते हैं, हम जो पानी पीते हैं, रोजमर्रा की जिंदगी के तनाव, ये सब हमें कई प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं। संसार में हम जितने अधिक सक्रिय रहते हैं, उतनी ही नकारात्मक चीजों के संपर्क में आते हैं जो हमारे रसायनिक संतुलन को बिगाड़ देती हैं, हमारे लिए स्वास्थ्य-समस्याएं खड़ी कर देती हैं। लेकिन, यदि अपने तंत्र में ऊर्जा को सही ढंग से तैयार किया जाए और उसे सक्रिय रखा जाए, तो इन चीजों का असर नहीं होगा। भौतिक और मानसिक शरीर पूरी तरह स्वस्थ रहेंगे, इसमें कोई शक नहीं।

आपने खुद को भौतिक और तार्किक तक सीमित किया है

 जीवन कई तरह से सक्रिय है। मान लीजिए, आप बिजली के बारे में कुछ नहीं जानते। आप नहीं जानते बिजली क्या है। हॉल में अंधेरा है। अगर मैं आपसे कहूं सिर्फ यह बटन दबाइये और सारे हॉल में रोशनी फैल जाती है, क्या आप मेरा विश्वास करेंगे? नहीं। ऐसे में अगर मेरे बटन दबाने से रोशनी प्रकट हो जाती है, तो आप इसे एक चमत्कार कहेंगे। सिर्फ इसलिये कि आप नहीं जानते बिजली कैसे कार्य करती है। इसी तरह, जीवन अनेक प्रकार से घटित होता है लेकिन आपने खुद को सिर्फ भौतिक व तार्किक तक सीमित कर रखा है - अनुभव में भौतिक और सोच में तार्किक।

अभी चिकित्सा विज्ञान सिर्फ स्थूल शरीर को जानने तक सीमित है। यदि इससे परे कुछ होता है, आप सोचते हैं यह चमत्कार है। मैं बस इसे एक दूसरे प्रकार का विज्ञान कहता हूं, इतना ही है। यह एक दूसरे प्रकार का विज्ञान है। आपके अन्दर की जीवन-ऊर्जा ने आपके संपूर्ण शरीर का निर्माण किया - ये अस्थियां, यह मांस, यह हृदय, ये गुर्दे और हर चीज। आप क्या सोचते हैं यह स्वास्थ्य पैदा नहीं कर सकती? यदि अपनी ऊर्जा को पूर्ण प्रवाह और उचित संतुलन में रखा जाए, तो ये महज स्वास्थ्य को बनाए रखने से ज्यादा बहुत कुछ करने में सक्षम है

Wednesday, 5 June 2019

शरीर में कैसा भी जहर हो, काली जीरी निकाल फेंकेगी बाहर




काली जीरी एक छोटे आकार का, औषधीय गुणों से भरपूर पौधा होता है। काली जीरी स्वाद में तीखी और तेज होती है हमारे मन और मस्तिष्क को ज्यादा उत्तेजित करती है। चरक संहिता में स्पष्ट उल्लेख है कि शरीर में कैसा भी जहर हो काली जीरी उसको नष्ट करने की क्षमता रखती है। हालांकि यह सामान्य जीरे की ही तरह है, लेकिन इसका रंग काला होता है और यह आम जीरे से मोटा होता है।

          


खून की सफाई में कारगरयह औषधीय पौधा बहुत सी बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। यह शुगर (डायबिटीज) पर नियंत्रण में उपयोगी है और आपके बालों की देखभाल और वृद्धि में लाभ पहुंचाता है। साथ ही चर्म रोगों में फायदेमंद है। यह आपके कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। यह खून की सफाई में कारगर है और पेट के कीड़े नष्ट करता है। कुष्ठ रोगियों को भी इससे लाभ हुआ है। यूरिन संबंधी समस्याओं के निदान के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यह गर्भाशय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, मेथी और अजवाइन के साथ लेने पर वजन घटाने में उपयोगी और जहरीले जीवों के काटने या डंक लगने पर इसका उपयोग लाभ देता है। काली जीरी का उपयोग गठिया, हड्डियां, आँखों की समस्याओं के निदान, और बालों के विकास आदि के लिए भी किया जा सकता है।
वजन घटाने के लिए भी है प्रभावीकाली जीरी में आपकी पाचन शक्ति बढ़ाने की क्षमता है। जिन लोगों को कब्ज या पेट वाली बीमारियाँ है वे इसमें दो अन्य औषधियां मिलाकर प्रयोग करें। इस मिश्रण को त्रियोग कहा जाता है। तीनों औषधियों में मैथीदाना, जमाण और काली जीरी का सही अनुपात होता है। यह तीनों चीजें आपको आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। वजन घटाने के लिए भी यह प्रभावी मानी जाती है। इसके लिए आप 20 ग्राम काली जीरी को 100 ग्राम मेथी और 40 ग्राम अजवाइन में मिलाएं, और सभी को हल्के से भून लें। इसके बाद इस मिश्रण को हवाबंद डिब्बे में रखें, ताकि ये हवा के संपर्क में लगातार न रहे। रोज सोने के पूर्व हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। यह महिलाओं के लिए वजन घटाने का एक विशेष उपाय है, इस पाउडर से पाचन में भी सुधार होता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतरचरक संहिता में बताया गया है कि स्पष्ट है कि शरीर में कैसा भी जहर हो काली जीरी उसको नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसमें शरीर में मौजूद हर प्रकार के कीड़ों को नष्ट करने की भी मारक क्षमता है। ५ ग्राम काली जीरी लेकर उसको २०० ग्राम पानी में धीमी आंच पर उबालें। जब पानी की मात्रा घटकर १०० ग्राम बच जाए तो उसको थोड़ा ठंडा करके पी जाएँ। लेकिन याद रखें, ये बहुत कड़वा होता है। केवल ५-६ दिन तक पीना पर्याप्त होता है। इसकी तासीर गर्म होती है और सभी के लिए उपयोगी और उपयुक्त हो यह आवश्यक नहीं है। इसलिए इसके प्रयोग से पहले किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लेने की सावधानी अवश्य बरतें।

Thursday, 3 January 2019

शरीर की सम्पूर्ण सफाई करने के लिए विशेष - शरीर शोधन चूर्ण


शरीर की सम्पूर्ण सफाई करने के लिए ये चूर्ण बहुत विशेष है. इस चूर्ण का उपयोग विशेष शरीर की सम्पूर्ण गंदगी को बाहर निकालने के लिए, आँतों की सफाई के लिए, पेट की सफाई के लिए, लीवर, तिल्ली, शूल एवम गर्भ के रोगों में भी बहुत लाभदायी है. 
                 कालादाना – 30 ग्राम. (कालादाना को कृष्ण बीज भी कहते हैं.)
                                                                सोनामुखी– 30 ग्राम व  काला नमक – 10 ग्राम.
सबसे पहले काले दाने और सनाय को पीस कूट कर छान लो, पीछे नमक को पीस छान कर उसी चूर्ण में मिला दो. इसी को शरीर शोधन चूर्ण कहते हैं.यह चूर्ण कब्ज मिटाने और दस्त खोलने में विचित्र है.यह चूर्ण यकृत, प्लीहा, शूल, और गर्भाशय, के रोगों में भी दिया जाता है, इनके सिवा, जिन रोगों में दवा देने से पहले कोठा साफ़ करने (पेट को बिलकुल साफ़) की ज़रूरत होती है, उन सबमे इसे दे सकते हैं. इसमें यह खूबी है के इससे पतला दस्त नहीं आता पर कोठे का सारा मल, बंधे हुए दस्त के रूप में निकल जाता है. इसकी सेवन की मात्रा 2 ग्राम से 5 ग्राम तक की है. एक दो दिन रात को सोते समय एक मात्रा चूर्ण फांक कर  ऊपर से गुनगुना जल पीना चाहिए. सवेरे ही एक या दो दस्त खुलासा होने से शरीर हल्का हो जाता है. पहले इसे थोड़ी मात्रा में सेवन करना चाहिए, पीछे मात्रा बढ़ा सकते हैं. लेकिन इस निर्देश के साथ के बलाबल अनुसार आरम्भ में मात्रा कम लें. अन्यथा पतले दस्त हो सकते हैं. इस दवा के खाने से पेट में दर्द सा होता है. क्यूंकि यह चूर्ण आँतों में जमे हुए मल को खुरचता है. ऐसी दशा में थोड़ी सी सौंफ मुंह में रख कर चूसने से शीघ्र ही मल निकल जाता है

Thursday, 27 December 2018

हरड़े

https://youtu.be/XD1_snU2nGc

पेट के लिए बढ़िया औषधि है हरड़ ओर हरड़ के फायदे - विनय आयुर्वेदा

                                  पेट के लिए बढ़िया औषधि है हरड़ 
  
हरड़  दो प्रकार की होती  हैं− बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। बड़ी हरड़ में सख्त गुठली होती है जबकि छोटी हरड़ में कोई गुठली नहीं होती। वास्तव में वे फल जो गुठली पैदा होने से पहले ही तोड़कर सुखा लिए जाते हैं उन्हें ही छोटी हरड़ की श्रेणी में रखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार छोटी हरड़ का प्रयोग निरापद होता है क्योंकि आंतों पर इसका प्रभाव सौम्य होता है। 
बवासीर, सभी उदर रोगों, संग्रहणी आदि रोगों में हरड़ बहुत लाभकारी होती है। आंतों की नियमित सफाई के लिए नियमित रूप से हरड़ का प्रयोग लाभकारी है। लंबे समय से चली आ रही पेचिश तथा दस्त आदि से छुटकारा पाने के लिए हरड़ का प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार के उदरस्थ कृमियों को नष्ट करने में भी हरड़ बहुत प्रभावकारी होती है।
अतिसार में हरड़ विशेष रूप से लाभकारी है। यह आंतों को संकुचित कर रक्तस्राव को कम करती हैं वास्तव में यही रक्तस्राव अतिसार के रोगी को कमजोर बना देता है। हरड़ एक अच्छी जीवाणुरोधी भी होती है। अपने जीवाणुनाशी गुण के कारण ही हरड़ के एनिमा से अल्सरेरिक कोलाइटिस जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं।
इन सभी रोगों के उपचार के लिए हरड़ के चूर्ण की तीन से चार ग्राम मात्रा का दिन में दो−तीन बार सेवन करना चाहिए। कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधे नमक में मिलाकर देना चाहिए। अतिसार होने पर हरड़ गर्म पानी में उबालकर प्रयोग की जाती है जबकि संग्रहणी में हरड़ चूर्ण को गर्म जल के साथ दिया जा सकता है।
हरड़ का चूर्ण, गोमूत्र तथा गुड़ मिलाकर रात भर रखने और सुबह यह मिश्रण रोगी को पीने के लिए दें इससे बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा इन रोगों के उपचार के लिए हरड़ का चूर्ण दही या मट्ठे के साथ भी दिया जा सकता है।
लीवर, स्पलीन बढ़ने तथा उदरस्थ कृमि आदि रोगों की इलाज के लिए लगभग दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए। हरड़ त्रिदोष नाशक है परन्तु फिर भी इसे विशेष रूप से वात शामक माना जाता है। अपने इसी वातशामक गुण के कारण हमारा संपूर्ण पाचन संस्थान इससे प्रभावित होता है। यह दुर्बल नाड़ियों को मजबूत बनाती है तथा कोषीय तथा अंर्तकोषीय किसी भी प्रकार के शोध निवारण में प्रमुख भूमिका निभाती है।
अगर आपको गैस या कब्ज की शिकायत है तो काली हरड़ को चूसें। खाना खाने के बाद अच्छी तरह धुली हुई काली हरड़ मुंह में रख लें। अगर इसे चूस कर सेवन करने में दिक्कत महसूस करें तो रात में एक गिलास में 250 ग्राम पानी में एक हरड़ डाल दें औरसुबह सूर्योदय से पहले उस पानी को पी लें। कब्ज या गैस से पूरी तरह मुक्ति के लिए चार से छह महीने तक हरड़ का सेवन करें।
 हरड़ हमारे लिए बहुत उपयोगी है परन्तु फिर भी कमजोर शरीर वाले व्यक्ति, अवसादग्रस्त व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्रियों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

Wednesday, 26 December 2018

आमवात ( Rheumatoid ) – कारण और आयुर्वेद औषध व्यवस्था

आयुर्वेद में बहुत सी वात व्याधियों का वर्णन है | इनमे से एक आमवात  है जिसे हम गठिया रोग भी कह सकते है | आमवात में पुरे शरीर की संधियों में तीव्र पीड़ा होती है साथ ही संधियों में सुजन भी रहती है | आमवात होने का प्रमुख कारण है हमारे शरीर मे दूषित वायु का बढ़ जाना हमारे  शरीर के सभी जोड़ो मे थोड़ा रिक्त स्थान होता है ओर हमारे शरीर मे उतपन्न दूषित वायु इन जोड़ो की रिक्त स्थान मे जमा हो जाती है ओर उसका परिणाम हम देखते है आमवात !   आमवात के रोगियो को सुबह सूर्योदय के पूर्व उठकर बासी मुह कम से कम 1 लीटर गुनगुना पानी बेठकर शिप शिप पीना चाहिए ! हमारी सुबह की लार के साथ गुनगुना पानी पीना आमवात के रोगियो के संजीवनी बूटी जेसा कार्य करता है क्यू की गुनगुना पानी पीने से छोटी आंत व बड़ी आंत से सफाई होते हुए अद्पच्चे अन्न से बने आम व मल पूरा साफ़ हो जाता है सुबह गुनगुना पानी पीने  का हमारे शरीर मे हुए बदलाव 7 दिन मे दिखने लगते है  

आमवात दो शब्दों से मिलकर बना है  – आम + वात |
आम अर्थात अद्पच्चा अन्न या एसिड और वात से तात्पर्य दूषित वायु | जब अद्पच्चे अन्न से बने आम के साथ दूषित वायु मिलती है तो ये संधियों में अपना आश्रय बना लेती है और आगे चल कर संधिशोथ व शुल्युक्त व्याधि का रूप ले लेती जिसे आयुर्वेद में आमवात और बोलचाल की भाषा में गठिया रोग कहते है | चरक संहिता में भी आमवात विकार की अवधारणा  का वर्णन मिलता है लेकिन आमवात रोग का विस्तृत वर्णन माधव निदान में मिलता है |
आमवात के कारण 
आयुर्वेद में विरुद्ध आहार को इसका मुख्य कारण माना है | मन्दाग्नि का मनुष्य जब स्वाद के विवश होकर स्निग्ध आहार का सेवन करता और तुरंत बाद व्यायाम कोई शारीरिक श्रम करता है तो उसे आमवात होने की सम्भावना हो जाती है | रुक्ष , शीतल विषम आहार – विहार, अपोष्ण संधियों में कोई चोट, अत्यधिक् व्यायाम, रात्रि जागरण , शोक , भय , चिंता , अधारणीय वेगो को धारण करने से आदि शारीरिक और मानसिक वातवरणजन्य कारणों के कारण आमवात होता है | 
आमवात के लिए कोई बाहरी कारण जिम्मेदार नहीं होता इसके लिए जिम्मेदार होता है हमारा खान-पान | विरुद्ध आहार के सेवन से शारीर में आम अर्थात यूरिक एसिड की अधिकता हो जाती है | साधारनतया हमारे शरीर में यूरिक एसिड बनता रहता है लेकिन वो मूत्र के साथ बाहर भी निकलता रहता है | जब अहितकर आहार और अनियमित दिन्चरिया के कारन यह शरीर से बाहर नहीं निकलता तो शरीर में इक्कठा होते रहता है और एक मात्रा से अधिक इक्कठा होने के बाद यह संधियों में पीड़ा देना शुरू कर देता है क्योकि यूरिक एसिड मुख्यतया संधियों में ही बनता है और इक्कठा होता है | इसलिए बढ़ा हुआ यूरिक एसिड ही आमवात का कारन बनता है |

वातहर योग ( हर्बल उकाला ) को 3 महिना सेवन करने से 100 % परिणाम प्राप्त हुए है आप चाहे तो मो - 84607 83401 पर कॉल करके मंगा सकते है इसकी कीमत 1  माह की 750 /- रुपए व 3 माह 1850 /- है   
आमवात के संप्राप्ति घटक 
दोष – वात और कफ प्रधान / आमदोष |
दूषित होने वाले अवयव – रस , रक्त, मांस, स्नायु और  अस्थियो में संधि |
अधिष्ठान – संधि प्रदेश / अस्थियो की संधि |
रोग के पूर्वप्रभाव – अग्निमंध्य, आलस्य , अंग्म्रद, हृदय भारीपन, शाखाओ में स्थिलता |
आचार्य माधवकर ने आमवात को चार भागो में विभक्त किया है 
1. वातप्रधान आमवात 
2. पितप्रधान आमवात 
3. कफप्रधान आमवात  
4. सन्निपताज आमवात 

आमवात में औषध प्रयोग 

आमवात में मुख्यतया संतुलित आहार -विहार का ध्यान रखे और यूरिक एसिड को बढ़ाने वाले भोजन का त्याग करे | अधिक से अधिक पानी पिए ताकि शरीर में बने हुए विजातीय तत्व मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकलते रहे | संतुलित और सुपाच्य आहार के साथ विटामिन इ ,सी और भरपूर प्रोटीन युक्त भोजन को ग्रहण करे | अधिक वसा युक्त और तली हुई चीजो से परहेज रखे | 
इसके अलावा आप निम्न सारणी से देख सकते है आमवात की औषध व्यवस्था 

क्वाथ प्रयोग – रस्नासप्तक , रास्नापंचक , दशमूल क्वाथ, पुनर्नवा कषाय आदि |
स्वरस – निर्गुन्डी, पुनर्नवा , रास्ना आदि का स्वरस |
चूर्ण प्रयोग – अज्मोदादी चूर्ण, पंचकोल चूर्ण, शतपुष्पदी चूर्ण , चतुर्बिज चूर्ण |
वटी प्रयोग – संजीवनी वटी , रसोंनवटी, आम्वातादी वटी , चित्रकादी वटी , अग्नितुण्डी वटी आदि |
गुगुल्ल प्रयोग – सिंहनाद गुगुल्लू , योगराज गुगुल , कैशोर गुगुल , त्र्योंग्दशांग गुगुल्ल आदि |
भस्म प्रयोग – गोदंती भस्म, वंग भस्म आदि |
रस प्रयोग – महावातविध्वंसन रस, मल्लासिंदुर रस , समिर्पन्न्ग रस, वात्गुन्जकुश |
लौह – विदंगादी लौह, नवायस लौह , शिलाजीतत्वादी लौह, त्रिफलादी लौह |
अरिष्ट / आसव – पुनर्नवा आसव , अम्रितारिष्ट , दशमूलारिष्ट आदि |
तेल / घृत ( स्थानिक प्रयोग ) – एरंडस्नेह, सैन्धाव्स्नेह, प्रसारिणी तेल, सुष्ठी घृत आदि का स्थानिक प्रयोग 
स्वेदन – पत्रपिंड स्वेद, निर्गुन्द्यादी पत्र वाष्प |
सेक – निर्गुन्डी , हरिद्रा और एरंडपत्र से पोटली बना कर सेक करे | 
इसके अतिरिक्त हमे प्राचीन शास्त्रो से प्राप्त एक नुस्खा वातहर योग  द्वारा बहुत से मरीजो पर अपनाए जिसमे काफी अच्छा परिणाम प्राप्त हुआ है !  
वातहर योग( हर्बल उकाला ) को 3 महिना सेवन करने से 100 % परिणाम प्राप्त हुए है आप चाहे तो मो - 84607 83401 पर कॉल करके मंगा सकते है इसकी कीमत 1  माह की 750 /- रुपए व 3 माह 1850 /- है   

Tuesday, 25 December 2018

महिलाओ को होने वाले श्वेत प्रदर ( सफेद पानी ) का घरेलू इलाज

स्त्रियों की योनी से सफेद पानी का बहना एक साधारण समस्या है. इसमें योनी से पानी जैसा स्त्राव होता है. य़ह खुद कोई रोग नहीं है. लेकिन यह स्त्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन जाता है. इसके कारण चिड़चिड़ापन, पैर-हाथ में दर्द इत्यादि का सामना करना पड़ता है. तो आइए हम जानते हैं कि घरेलू उपायों द्वारा कैसे श्वेत प्रदर को खत्म किया जा सकता है. आपको क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं.


श्वेत प्रदर ( सफेद पानी ) की समस्या खत्म करने के घरेलू उपाय :
  • हर दिन कच्चा टमाटर खाना शुरू करें.
  • सुबह-शाम 2 चम्मच प्याज का रस और उतनी हीं मात्रा में शहद मिलाकर पिएँ.
  • जीरा भूनकर चीनी के साथ खाने से फायदा होगा.
  • आंवले का रस और शहद लगातार 1 महीने तक सेवन करें. इससे श्वेत प्रदर ठीक हो जायेगा.
  • हर दिन केला खाएँ, इसके बाद दूध में शहद डालकर पिएँ. इसके आपकी सेहत भी अच्छी होगी और श्राव के कारण होने वाली कमजोरी भी दूर होगी. कम-से-कम तीन महीने तक यह उपाय करें, दूध के ठंडा हो जाने के बाद उसमें शहद डालें.
  • कच्चे केले की सब्जी खाएँ.
  • अगर आपके शरीर में खून की कमी है, तो खून बढ़ाने के लिए हरी सब्जियाँ, फल, चुकन्दर इत्यादि खाएँ.
  • 1 केला लें, उसे बीच से काट लें. उसमें 1 ग्राम फिटकरी भर दें, इसे दिन या रात में एक बार खाएँ. लेकिन ध्यान रखें कि अगर दिन में खाना शुरू किया तो, दिन में हीं खाएँ. और अगर रात में खाना शुरू किया हो, तो रात में हीं खाएँ.
  • तले-भूने चीज या मसालेदार चीज नहीं के बराबर खाएँ.
  • योनी की साफ-सफाई का ध्यान रखें.
  • मैदे से बनी चीजें न खाएँ.
  • एक बड़ा चम्मच तुलसी का रस लें, और उतनी हीं मात्रा में शहद लें. फिर इसे खा लें. इससे आपको आराम मिलेगा.
  • . अनार के हरे पत्ते लें, 25-30 पत्ते…. 10-12 काली मिर्च के साथ पीस लें. इसमें आधा ग्लास पानी डालें, फिर छानकर पी लीजिए. ऐसा सुबह-शाम करें.
  • भूने चने में खांण्ड (गुड़ की शक्कर) मिलाकर खाएँ, इसके बाद 1 कप दूध में देशी घी डाल कर पिएँ.
  • 10 ग्राम सोंठ का, एक कप पानी में काढ़ा बनाकर पिएँ. ऐसा एक महीने तक करें.
  • पीपल के 2-4 कोमल पत्ते लेकर, पीस लें. फिर इसे दूध में उबालकर पिएँ.
  • 1 चम्मच आंवला चूर्ण लें और 2-3 चम्मच शहद लें. और इन्हें आपस में मिलाकर खाएँ. ऐसा एक महीने तक करें.
  • खूब पानी पिएँ.
  • सिंघाड़े के आटे का हलुआ और इसकी रोटी खाएँ.
  • 3 ग्राम शतावरी या सफेद मूसली लें, फिर इसमें 3 ग्राम मिस्री मिलाकर, गर्म दूध के साथ इसका सेवन करें.
  • नागरमोथा, लाल चंदन, आक के फूल, अडूसा चिरायता, दारूहल्दी, रसौता, इन सबको 25-25 ग्राम लेकर पीस लें. पौन लीटर पानी में उबालें, जब यह आधा रह जाय तो छानकर उसमें 100 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो बार 50-50 ग्राम सेवन करें.
  • माजू फल, बड़ी इलायची और मिस्री को बराबर मात्रा में पीस लें. एक सप्ताह तक दिन में तीन बार लें. एक सप्ताह के बाद फिर दिन में एक बार 21 दिन तक लें.

Monday, 24 December 2018

डिनर छोड़े - चुस्त दुरस्त निरोगी रहे

डिनर छोड़ें : चुस्त दुरुस्त निरोग रहें

बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार से एकबार पत्रकारों ने पूछा कि आपकी सेहत का क्या राज है। अक्षय कुमार का जवाब विल्कुल ही आयुर्वेद के सूत्रों पर आधारित था। अक्षय ने कहा कि मैं कभी भी सूरज डूबने के बाद डिनर (रात्रि भोजन) नहीं करता। हमेशा सूर्यास्त के पहले डिनर कर लेता हूं। इसके बाद अक्षय ने इसके फायदे बताए, तो सबलोग दंग रह गए और जब अक्षय ने सूर्यास्त के बाद डिनर करने के नुकसान बताए, तो लोग एकदम से डर गए।

दरअसल यह आयुर्वेद का सूत्र है—

चरक संहिता और अष्टांग संग्रह भी रात में खाने से बचने के लिए कहता हैं;क्योंकि उस समय जठराग्नि, जो खाना पचाने का काम करती हैं,बहुत कमजोर रहती है. जैसे-जैसे सूर्य ढलता है, जठराग्नि भी मंद पड़ने लगती है.

सायं भुक्त्वा लघु हितं समाहितमना: शुचि:|
शास्तारमनुसंस्मृत्य स्वशय्यां चाथ संविशेत ||

रात्रौ तु भोजनं कुर्यातत्प्रथमप्रहरान्तरे|
किञ्चिदूनंसमश्नयाद्दुर्जरं तत्र पर्जयेत् ||

रात का भोजन सूर्यास्त के पूर्व ही कर लेना चाहिए और पेट भरकर नहीं खाना चाहिए, पेट को कुछ खाली रखकर ही भोजन करना चाहिए.

हिंदुओं के प्राचीन शास्त्रों में भी यह कहा गया है कि, “चत्वारि नरक्द्वाराणि प्रथमं रात्रिभोजनम्”, मतलब रात्रिभोजन नरक का पहला द्वार है| 'नरक के द्वार' से अभिप्राय यहां अस्वस्थता ही समझें.
"जो व्यक्ति शराब, मांस, पेय, सूर्यास्त के बाद खाता है और जमीन के नीचे उगाई सब्जियों का उपभोग करता है; उस व्यक्ति के किये गए तीर्थयात्रा, प्रार्थना और किसी भी प्रकार कि भक्ति बेकार हैं|"
- महाभारत (रिशिश्वरभरत)

जैन धर्म में भी सूर्यास्त के बाद भोजन निषिद्ध है. वे तो अबतक पालन कर रहे हैं.

भगवान बुद्ध भी अपने भक्तों को आयुर्वेद का ये उपदेश देते हुए कहा करते थे कि स्वस्थ और युवा रहना चाहते हो, तो कभी भी सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करो। हमेशा सूर्य डूबने से पहले भोजन कर लो और किसी हाल में सूर्यास्त के बाद कुछ भी न खाओ। लोग उनकी बात मान कर ऐसा ही करते थे और मोटापे सहित कई गंभीर वीमारियों से बचे रहते थे, पर बाद में लोगों ने यह कहकर इसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया कि चूंकि प्राचीन काल में बिजली नहीं थी, इसीलिए लोग जल्दी खाना खा लेते थे। ऐसा कहने वाले लोगों ने देर रात डिनर करने की आदत लगायी. बहुत पहले लोग रात में नहीं खाते थे. गांव के लोग तो विल्कुल ही नहीं खाते थे. और, अब हाल यह है कि मोटापा दुनिया में महामारी बन चुका है।
अब जब यही बात अमेरिका और यूरोप के वैज्ञानिक शोध (रिसर्च) के बाद कह रहे हैं, तो सबके कान खड़े हुए हैं।

अगर आप सूरज डूबने से पहले डिनर कर लेंगे, तो यह तय है कि आपको मोटापे की समस्या से कभी नहीं जूझना पड़ेगा और अगर आप मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं, तो आपको इससे जरूर मुक्ति मिल जाएगी। अगर आप कब्ज, गैस या दूसरी तरह की पेट की बीमारियों से जूझ रहे हैं या फिर पेट बाहर निकल रहा है, तो सूर्यास्त से पहले भोजन करना इसका रामबाण इलाज है। इससे कब्ज, गैस और दूसरी पेट की वीमारियों से मुक्ति मिलेगी। दरअसल डिनर करने और बेड पर सोने जाने के बीच गैप (समय का अंतर) होना चाहिए। ऐसा न हो कि रात 10 बजे डिनर किया और 10.30 बजे सो गए। जब ऐसा होता है, तो इससे पेट से संबंधित समस्याएं पैदा होती है। कब्ज, गैस और दूसरी समस्याएं होती हैं। इन्हीं समस्याओं से हृदय व्याधि भी होती है.

जब हम सोने जाते हैं तो हमारे शरीर के अधिकांश अंग रेस्ट मोड में चले जाते हैं;पर जब हम देर से डिनर करते हैं, तो हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम सोते वक्त भी पूरी तेजी से काम करता रहता है। इस वजह से गहरी नींद नहीं आती, नींद कई बार टूट भी जाती है, निद्रा-चक्र में व्यवधान होता है, जिससे कलेजे में जलन महसूस होता है. रात में भोजन करने से पेशाब में वृद्धि और उत्सर्जन की आवश्यकताएं बढ़ जाती हैं, जिससे अनावश्यक निद्रा-नाश होता है. अगर हम सूर्यास्त के पहले भोजन कर लेंगे, तो सुबह सोकर उठने पर खुद को ताजा-ताजा महसूस करेंगे। सुबह  से ही अच्छे मूड में बने रहेंगे.

बहुत से लोग ये कहने लगते हैं कि हमारा जीवन शैली ही कुछ ऐसी है कि जल्दी नहीं खा सकते, पार्टियों में जाना पड़ता है या फिर प्रोफेशन ही ऐसा है। बॉलीवुड में अपनी फिटनेस के लिए खिलाड़ियों के खिलाड़ी के नाम से मशहूर अक्षय कुमार कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं सूर्यास्त के बाद डिनर नहीं करता। अगर अक्षय ऐसा कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं? आपको चुस्त-दुरुस्त और निरोगी बने रह
ना है, तो डिनर छोड़ ही दें. यह भारतीय संस्कृति है भी नहीं.
विनय आयुर्वेदा 👍💐
🚩🚩🚩🚩🚩

Monday, 17 December 2018

अकेलापन बन सकता है मोत की वजह - श्री मदन जी मोदी

अकेलापन बन सकता है मौत की वजह
अगर आप उन लोगों में से हैं जिनके पास ज्यादा दोस्त नहीं हैं या फिर उनमें से जिन्हें दूसरों से मेलजोल बढ़ाने में भी कोई खास रुचि नहीं है, तो आपके लिए बुरी खबर है। अकेलेपन से  हार्ट अटैक  का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है। इसके अलावा समय से पहले मरने के संभावना भी 50 फीसदी तक बढ़ जाती है। जो लोग पहले से दिल के मरीज रहे हैं, उनमें से ज्यादातर लोगों की  मौत  अकेलेपन से ही हुई है। जो लोग अकेलेपन के शिकार होते हैं, उन्हें क्रॉनिक डिजीज का खतरा काफी ज्यादा होता है और ऐसे लोगों में  डिप्रेशन  का खतरा भी ज्यादा हो जाता है।
उन लोगों को मौत का खतरा ज्यादा होता है, जो समाज से कटकर अकेले रहते हैं या फिर कम लोगों से मेलजोल रखने के चलते पहले से ही कॉर्डियोवस्कुलर बीमारी से ग्रस्त होते हैं। दोस्तों और फैमिली के बीच रहकर आप इन बीमारियों से बच सकते हैं।
इसके अलावा भी हैं कई कारण
1.अकेलेपन के कारण डिप्रेशन का रिस्क बढ़ता है। अगर आप अकेलेपन के शिकार हैं और काफी उदास और डाउन महसूस कर रहे हैं तो तुरंत हम से संपर्क करें, ये खतरनाक साबित हो सकता है।
2.आप जब अकेले रहते हैं तो उस समय आने वाले भविष्य और करियर को लेकर काफी स्ट्रेस होता है, जो कि आपकी हेल्थ के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है।
3. अकेलेपन का असर आपकी डायट और फूड हैबिट पर भी पड़ता है, इस समय आप जंक फूड ज्यादा प्रिफर करते हैं और एक्सर्साइज भी नहीं करते। सेहत की दृष्टि से ये बहुत ही खराब है और इसका असर आपकी बॉडी पर दिखता है।
क्या करें?
1.अपने करीबी और खास दोस्तों के संपर्क में जरूर रहें। वैसे अकेलेपन में रिश्ता बनाए रखना भी काफी मुश्किल होता है, लेकिन आखिर में आपको फायदा भी इसी से होता है।
2.जब भी अकेला महसूस करें तो कहीं किसी के पास चले जाएं, इससे आप अकेलेपन से बच सकते हैं।
3.रिश्तों को सुधारने की कोशिश करें, ज्यादा से ज्यादा समय घरवालों और दोस्तों के बीच बिताएं।
एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि इंसान शारिरिक और मानसिक रूप से समाज में रहने के लिए ही बना है, अकेले रहना हमारा गुण ही नहीं हैं। अगर आप अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं, इसका मतलब प्रकृति ने हमें जैसा बनाया है आप उसके खिलाफ जा रहे हैं।
लेखक - श्री मदन जी मोदी की वाल से

चिकित्सा जगत की सबसे पुरानी औषधि है आयुर्वेद


  • स्मैक, चरस, गांजा जैसे नशीली पदार्थो से मुक्ति दिलाता है आयुर्वेद
  • आयुर्वेद की औषधियां समय के अनुसार काम करती है
  • सर्वप्रथम सर्जरी आयुर्वेद में ही शुरू हुई थी               
  • आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है आयुर्वेद द्वारा कठिन और पुरानी बिमारियों का इलाज संभव है आयुर्वेद की विशेषता यह है कि इसकी औषधियां दुष्प्रभाव और पश्चात प्रभाव नहीं करती सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी औषधियां रस रसायन जीतनी पुरानी होती है वो उतनी ही पावरफुल होती जाती है। जड़ी बूटियों पर आधारित आयुर्वेद की औषधियां समय के अनुसार काम करती है। बहुत से लोगों को भरम है कि आयुर्वेद मे सर्जरी नहीं होती लेकिन बता दें की सर्वप्रथम सर्जरी आयुर्वेद में ही शुरू हुई थी।
    प्रसिद्ध चिकित्सक सुशुत सर्जरी के जनक थे उन्होंने सबसे पहले सर्जरी की थी जैसे की लोगों का मानना है कि आयुर्वेद में इमरजेंसी नहीं होती यह भी लोगों का भ्रम है आयुर्वेद में भी इमरजेंसी की मेडिसिन है लेकिन आधुनिकता और भौतिक वादी समाज में लोगों एलोपैथ को अपना रहे है। महंगी दवाओं के साथ अपने शरीर को बर्बाद कर रहे है। आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम और सुरक्षित पद्धति है जो सभी विमारियो को दूर भगाता है निदान के क्षेत्र में आयुर्वेद का नाड़ी बिज्ञान, का विश्व में कोई जबाब नहीं है।नाड़ी देख कर डायलिसिस तथा नेत्र वक्र बिकारतः निदान आयुर्बेद की विशेषता है जिस तरह देश से हिंदी, संस्कृत ,योग समाप्त हो गया उसी तरह आयुर्वेद भी समाप्त होता गया। दूसरा कारण सरकार की उपेक्षा का है भारतीय ज्ञान विज्ञान को हुए दृष्टि से देखा जाने लगा। आयुर्वेद का दुष्प्रचार होता गया जहां सरकार ने एलोपैथ पर 100 फीसद खर्च किया। वहीं आयुर्वेद पर 5 फीसद भी खर्च नहीं किया जो काफी सोचनीय विषय है जंगल में जैसे सुगन्धित फूल सबको आकर्षित करता है। उसी तरह आयुर्वेद का सुगंध भी लोगों को आकर्षित करेगा।  आयुर्वेद में सभी नशा से मुक्ति के औषधि पायी जाती है। जिससे शराब, स्मैक, चरस, गांजा, भांग जैसे नशीली पदार्थो से मुक्ति दिलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि नशा करने से सामाजिक, मानसिक, बौद्धिक, पारिवारिक, मन, बुद्धि सहित सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो जाती है।